नवजात शिशु को लंबी नींद दिलाने का तरीका

नवजात शिशु को लंबे समय तक सोने में मदद करने के लिए प्रभावी और सुरक्षित तरीके।

  1. दिन और रात का अंतर सिखाएं. दिन के समय घर में प्राकृतिक रोशनी आने दें और सामान्य घरेलू आवाजें होने दें। जब बच्चा दिन में जागा हो तो उससे बात करें, खेलें और गतिविधियां करें। रात के समय कमरे को अंधेरा रखें, आवाज कम करें और फीडिंग के दौरान ज्यादा बातचीत या खेल से बचें। इससे बच्चे के शरीर की प्राकृतिक घड़ी सेट होने में मदद मिलती है।
  2. सोने का माहौल बनाएं. बच्चे का कमरा शांत, अंधेरा और हल्का ठंडा (18-20 डिग्री) रखें। बहुत तेज आवाज से बचें लेकिन घर की सामान्य आवाजों से डरने की जरूरत नहीं। अगर जरूरत हो तो व्हाइट नॉइज मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुनिश्चित करें कि बच्चे का बिस्तर सुरक्षित है - मजबूत गद्दा, कोई ढीले कपड़े या तकिए न हों।
  3. सोने से पहले की दिनचर्या बनाएं. हर रात एक ही क्रम में काम करें - जैसे नहलाना, मालिश करना, खाना खिलाना, और फिर सुलाना। यह दिनचर्या बच्चे को संकेत देती है कि अब सोने का समय है। दिनचर्या सरल रखें और 20-30 मिनट से ज्यादा लंबी न करें। निरंतरता बनाए रखें - रोज एक ही समय पर यह दिनचर्या करें।
  4. फीडिंग का सही तरीका अपनाएं. रात की फीडिंग के दौरान रोशनी कम रखें और बातचीत से बचें। बच्चे को खिलाने के बाद डकार जरूर दिलवाएं। अगर बच्चा बोतल से दूध पीता है तो आखिरी फीडिंग में थोड़ा ज्यादा दूध दे सकते हैं (डॉक्टर की सलाह के अनुसार)। रात में बच्चे को तुरंत उठाने के बजाय 2-3 मिनट इंतजार करें - कभी-कभी वे खुद ही वापस सो जाते हैं।
  5. स्वैडलिंग की तकनीक सीखें. नवजात शिशुओं को सुरक्षित तरीके से कपड़े में लपेटने (स्वैडलिंग) से उन्हें गर्भ जैसा एहसास होता है और वे बेहतर सोते हैं। स्वैडलिंग करते समय बच्चे के कूल्हों को हिलने की जगह दें और बहुत कसकर न लपेटें। जब बच्चा पलटना सीख जाए (आमतौर पर 2-4 महीने में) तो स्वैडलिंग बंद कर दें।
  6. धैर्य रखें और संकेतों को समझें. हर बच्चा अलग होता है और नींद के पैटर्न विकसित होने में 3-6 महीने लग सकते हैं। बच्चे की थकान के संकेत पहचानें - जैसे आंखें मलना, जम्हाई लेना, चिड़चिड़ाहट। इन संकेतों को देखते ही बच्चे को सुलाने की कोशिश करें। अगर बच्चा बहुत थक जाए तो उसे सुलाना मुश्किल हो जाता है।