बच्चे को अपने कमरे में सुलाने की पूरी गाइड

बच्चे को अलग कमरे में सुलाने के लिए व्यावहारिक तरीके और सुझाव।

  1. कब करें यह बदलाव. आदर्श रूप से बच्चा जब 4-6 महीने का हो जाए तो इस बदलाव की शुरुआत कर सकते हैं। इस उम्र में बच्चे की नींद का पैटर्न थोड़ा स्थिर हो जाता है। हालांकि, हर बच्चा अलग होता है और आप अपनी सुविधा के अनुसार समय चुन सकते हैं। यदि बच्चा किसी बीमारी से उबर रहा हो या घर में कोई बड़ा बदलाव हो रहा हो तो इंतजार करना बेहतर है।
  2. कमरे की तैयारी. सबसे पहले बच्चे के कमरे को सुरक्षित और आरामदायक बनाएं। कमरे का तापमान 18-22 डिग्री सेल्सियस रखें। कमरा पूरी तरह अंधेरा हो सके इसके लिए मोटे पर्दे लगाएं। किसी भी तरह की तेज आवाज न आए इसका ध्यान रखें। बच्चे का बिस्तर सादा रखें - मुलायम गद्दा और फिटेड चादर काफी है। तकिया, कंबल या खिलौने न रखें।
  3. धीरे-धीरे बदलाव करें. अचानक से बदलाव न करके धीरे-धीरे शुरुआत करें। पहले दिन में बच्चे को उसके कमरे में सुलाएं जबकि रात को अपने पास रखें। फिर कुछ दिन बाद रात का पहला हिस्सा भी उसके कमरे में बिताने दें। अगले सप्ताह पूरी रात उसके कमरे में सुलाने का प्रयास करें। यदि बच्चा बहुत परेशान हो तो एक-दो दिन पीछे जाकर फिर कोशिश करें।
  4. सोने की दिनचर्या बनाए रखें. बच्चे की सोने से पहले की दिनचर्या बिल्कुल वैसी ही रखें जैसी पहले थी। नहलाना, मालिश करना, दूध पिलाना या गाना गाना - जो भी आपकी आदत है वो जारी रखें। केवल अंत में बच्चे को उसके कमरे में ले जाकर सुलाएं। यह निरंतरता बच्चे को सुरक्षा की भावना देती है।
  5. बेबी मॉनिटर का इस्तेमाल. बेबी मॉनिटर लगाना एक अच्छा विकल्प है जिससे आप बच्चे की आवाज सुन सकें। कई मॉनिटर में वीडियो की सुविधा भी होती है जिससे आप बच्चे को देख भी सकते हैं। शुरुआत में यह आपको मानसिक शांति देगा। लेकिन हर छोटी आवाज पर दौड़कर न जाएं - बच्चे को अपने आप शांत होने का मौका दें।
  6. रोने पर क्या करें. अगर बच्चा रोता है तो 2-3 मिनट इंतजार करें। अक्सर बच्चे अपने आप शांत हो जाते हैं। यदि रोना जारी रहे तो जाकर उसे शांत करें लेकिन उठाकर वापस अपने कमरे में न ले आएं। उसके पास बैठकर धीरे से सिर पर हाथ फेरें या गाना गुनगुनाएं। जब वो शांत हो जाए तो वापस अपने कमरे में चले जाएं।