बच्चों में नींद की समस्या के संकेतों को पहचानना
बच्चों में नींद संबंधी विकार के चेतावनी संकेतों को समझें और समय पर मदद लें।
- रात की नींद के दौरान दिखने वाले संकेत. अगर बच्चा रात में बार-बार जागता है, सांस लेने में दिक्कत होती है, या तेज खर्राटे लेता है तो यह चिंता की बात हो सकती है। कुछ बच्चे नींद में बहुत ज्यादा हिलते-डुलते हैं या बेचैन रहते हैं। सांस रुकना और दोबारा शुरू होना, मुंह से सांस लेना, या नींद में डरावने सपने भी नींद की समस्या के संकेत हैं। अगर बच्चा सोते समय बहुत पसीना बहाता है या अजीब आवाजें निकालता है तो भी ध्यान देना जरूरी है।
- दिन के समय दिखने वाले लक्षण. नींद की कमी से बच्चे दिन में सुस्त और चिड़चिड़े हो जाते हैं। वे पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पाते, भूलने की समस्या होती है, और व्यवहार में बदलाव आता है। कुछ बच्चे दिन में सो जाते हैं जबकि कुछ अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। सिरदर्द, मूड में अचानक बदलाव, और खेल या पसंदीदा गतिविधियों में रुचि न लेना भी आम संकेत हैं। स्कूल में परफॉर्मेंस गिरना या दोस्तों से दूरी बनाना भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
- सोने के समय की कठिनाइयां. अगर बच्चे को सोने में 30 मिनट से ज्यादा समय लगता है या वह बार-बार बिस्तर से उठता है तो यह समस्या का संकेत है। कुछ बच्चे सोने से डरते हैं, अकेले सोने से मना करते हैं, या रात के डर से परेशान रहते हैं। नींद से जुड़ी दिनचर्या का प्रभावी न होना, जैसे कि कहानी सुनाने या लोरी गाने के बाद भी न सो पाना, चिंता की बात है। बच्चे का लगातार माता-पिता के बिस्तर पर सोना चाहना भी ध्यान देने योग्य है।
- शारीरिक और व्यवहारिक बदलाव. नींद की समस्या से बच्चों की भूख प्रभावित होती है और वे कम या ज्यादा खाने लगते हैं। इम्यूनिटी कमजोर होने से वे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं। कुछ बच्चों में बिस्तर गीला करने की समस्या वापस आ जाती है। एकाग्रता की कमी से वे सामान्य काम भी ठीक से नहीं कर पाते। गुस्सैल होना, रोना, या अत्यधिक संवेदनशील हो जाना भी आम लक्षण हैं। कुछ बच्चे सामाजिक गतिविधियों से दूर हो जाते हैं।
- नींद की डायरी बनाना. बच्चे की नींद के पैटर्न को समझने के लिए 1-2 सप्ताह तक एक डायरी बनाएं। इसमें सोने का समय, जागने का समय, रात में कितनी बार जागा, और दिन भर का व्यवहार लिखें। यह भी नोट करें कि बच्चे ने क्या खाया, कितना शारीरिक खेल किया, और क्या कोई तनावपूर्ण घटना हुई। दोपहर की नींद का समय और अवधि भी जरूरी जानकारी है। यह डायरी डॉक्टर को दिखाते समय बहुत उपयोगी होगी।