नए भाई-बहन के आने पर नींद की समस्याओं को कैसे संभालें
नवजात के आगमन के बाद बड़े बच्चों और पूरे परिवार की नींद की दिनचर्या को बेहतर बनाने के व्यावहारिक तरीके।
- नवजात आने से पहले तैयारी करें. डिलीवरी से 2-3 हफ्ते पहले बड़े बच्चे को नई दिनचर्या की आदत डलवाना शुरू करें। अगर बच्चा आपके साथ सोता है तो उसे धीरे-धीरे अपने बिस्तर पर सुलाने की कोशिश करें। सोने के समय की गतिविधियां बदलें ताकि पापा या दादी-नानी भी बच्चे को सुला सकें। नवजात के कमरे में जाने पर बड़े बच्चे को शोर न करने की बात समझाएं।
- बड़े बच्चे की नींद की दिनचर्या बनाए रखें. नवजात की देखभाल के बावजूद भी बड़े बच्चे का सोने का समय और तरीका जितना हो सके उतना वही रखें। किताब पढ़ना, गाना गाना या मालिश जैसी पुरानी आदतें बनी रहने दें। अगर आप खुद नहीं सुला सकतीं तो पार्टनर या परिवार के अन्य सदस्यों से मदद लें। बच्चे को लगे कि उसकी अहमियत कम नहीं हुई है।
- कमरों का बंटवारा सोच-समझकर करें. शुरुआत में नवजात को अपने कमरे में रखें ताकि रात में फीडिंग आसान हो। बड़े बच्चे के कमरे में साउंड मशीन या पंखे की आवाज का इस्तेमाल करें ताकि नवजात के रोने की आवाज कम सुनाई दे। अगर दोनों बच्चे एक ही कमरे में सोते हैं तो शुरुआती कुछ महीनों तक अलग व्यवस्था करें।
- दिन की नींद का सदुपयोग करें. नवजात जब दिन में सोए तो बड़े बच्चे को भी आराम करने के लिए कहें, चाहे वो न भी सोए। इस समय शांत गतिविधियां जैसे कि पहेली, रंग भरना या किताब देखना करा सकते हैं। खुद भी इस दौरान थोड़ा आराम करें क्योंकि माँ का तनाव बच्चों की नींद को प्रभावित करता है।
- रात की फीडिंग के दौरान सावधानी बरतें. नवजात को रात में फीड कराते समय कम रोशनी का इस्तेमाल करें। बात-चीत कम से कम रखें और आवाज धीमी रखें। फीडिंग के बाद तुरंत नवजात को वापस सुलाने की कोशिश करें। बड़ा बच्चा अगर जग जाए तो उसे समझाएं कि बेबी को दूध की जरूरत होती है और जल्दी वापस सो जाने के लिए कहें।