स्कूली बच्चों की नींद की चिंता कैसे संभालें
स्कूली उम्र के बच्चों में नींद की परेशानी और डर को कम करने के आसान तरीके।
- नींद की दिनचर्या बनाएं. हर रात एक जैसी गतिविधियां करें। सोने से एक घंटे पहले टीवी, मोबाइल और तेज रोशनी बंद कर दें। नहाना, दांत साफ करना, कहानी पढ़ना जैसी शांत गतिविधियों का क्रम बनाएं। यह बच्चे के दिमाग को संकेत देता है कि अब सोने का समय है। दिनचर्या को बनाए रखने में लगभग 2-3 हफ्ते लगते हैं, इसलिए धैर्य रखें।
- बच्चे की चिंताओं को सुनें. बच्चे जब अपने डर के बारे में बताएं तो उन्हें गंभीरता से सुनें। 'कुछ नहीं है', 'डर की बात नहीं' कहने के बजाय उनकी भावनाओं को समझें। पूछें कि उन्हें क्या परेशान कर रहा है। कभी-कभी सिर्फ बात करने से ही बच्चे को राहत मिल जाती है। उनके डर को तर्कसंगत तरीके से समझाएं, लेकिन उसे नकारें नहीं।
- कमरे का माहौल आरामदायक बनाएं. बच्चे का कमरा उसके लिए सुरक्षित जगह बनाएं। हल्की रोशनी के लिए नाइट लैंप का इस्तेमाल करें। कमरा न बहुत गर्म हो न ठंडा। उनका पसंदीदा तकिया, कंबल या खिलौना पास रखें जो उन्हें सुकून दे। कमरे से डरावनी तस्वीरें या किताबें हटा दें। दरवाजा थोड़ा खुला रख सकते हैं ताकि बच्चा अकेला न लगे।
- श्वास और शांति की तकनीक सिखाएं. बच्चे को आसान सांस लेने की एक्सरसाइज सिखाएं। धीरे-धीरे सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। इसे '5-4-3-2-1 गेम' भी कह सकते हैं - 5 चीजें देखना, 4 आवाजें सुनना, 3 चीजों को छूना। यह बच्चे का ध्यान चिंता से हटाकर वर्तमान में लाता है। मांसपेशियों को कसकर छोड़ने की एक्सरसाइज भी सिखाएं।
- दिन में चिंता कम करें. सोने से पहले की चिंता अक्सर दिन भर के तनाव से आती है। स्कूल में कोई परेशानी, दोस्तों से झगड़ा, या पढ़ाई का दबाव हो सकता है। शाम को बच्चे से पूरे दिन के बारे में बात करें। अच्छी और बुरी दोनों बातें सुनें। समस्याओं का हल मिलकर सोचें। बच्चे को भरोसा दिलाएं कि आप हमेशा उसके साथ हैं।