साइबर बुलिंग का शिकार हो रहे किशोर की मदद कैसे करें

जानें कि अगर आपका किशोर ऑनलाइन परेशान किया जा रहा है तो कैसे उसकी सहायता और सुरक्षा करें।

  1. साइबर बुलिंग के संकेत पहचानें. अगर आपका किशोर अचानक फोन या कंप्यूटर इस्तेमाल करना बंद कर दे, स्कूल जाने से मना करे, या चिड़चिड़ाहट और उदासी दिखाए तो ये साइबर बुलिंग के संकेत हो सकते हैं। नींद में कमी, भूख न लगना, और दोस्तों से दूरी बनाना भी चेतावनी के संकेत हैं। अगर वो डिवाइस देखने के बाद परेशान हो जाता है या छुप-छुपकर इंटरनेट इस्तेमाल करता है तो सावधान हो जाएं।
  2. अपने बच्चे से बातचीत करें. शांत माहौल में अपने किशोर से बात करें। उसे बताएं कि आपको लगता है वो परेशान है और आप उसकी मदद करना चाहते हैं। उसकी बात धैर्य से सुनें और उसे दोष न दें। कहें 'मैं तुम्हारे साथ हूं' और 'ये तुम्हारी गलती नहीं है।' उसे यकीन दिलाएं कि बताने से कोई मुसीबत नहीं होगी बल्कि समस्या का हल मिलेगा।
  3. सबूत इकट्ठा करें और संभालकर रखें. साइबर बुलिंग के सभी संदेश, तस्वीरें, और वीडियो का स्क्रीनशॉट लें। तारीख और समय भी नोट करें। इन्हें डिलीट न करें क्योंकि ये आगे काम आ सकते हैं। बुली के यूजरनेम, प्रोफाइल लिंक, और फोन नंबर की जानकारी रिकॉर्ड करें। अगर कोई गवाह है तो उनसे भी बात करें।
  4. तुरंत ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें. सभी प्लेटफॉर्म पर बुली को तुरंत ब्लॉक करें। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सअप, स्नैपचैट जैसी सभी सोशल मीडिया साइट्स पर इसकी रिपोर्ट करें। स्कूल को भी सूचना दें क्योंकि बुली आपके बच्चे का सहपाठी हो सकता है। अगर धमकी मिली है या नुकसान की बात कही गई है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
  5. बच्चे की भावनाओं का सहारा दें. अपने किशोर को बताएं कि आप उसके साथ हैं और वो अकेला नहीं है। उसकी परेशानी को समझें और उसे सुरक्षा का अहसास दिलाएं। खुद को दोष देने से रोकें और उसके अच्छे गुणों की तारीफ करें। साथ में कुछ अच्छा करें जैसे फिल्म देखना या बाहर घूमना। उसे दोस्तों और परिवार से जुड़े रहने को कहें।
  6. ऑनलाइन सुरक्षा के नियम बनाएं. आगे के लिए ऑनलाइन सुरक्षा के नियम तय करें। प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें और अनजान लोगों से बात न करने के लिए कहें। सोशल मीडिया अकाउंट्स को प्राइवेट रखें। व्यक्तिगत जानकारी शेयर न करने की सलाह दें। डिवाइस का इस्तेमाल कॉमन एरिया में करने को कहें ताकि आप नजर रख सकें।