स्कूल वापसी की चिंता से कैसे निपटें

बच्चों की स्कूल जाने की चिंता को कम करने के व्यावहारिक तरीके जानें।

  1. बच्चे की चिंता के संकेत पहचानें. बच्चे अक्सर अपनी चिंता सीधे नहीं बताते। पेट में दर्द, सिरदर्द, रोना, गुस्सा होना, या अचानक से चिपकने वाला व्यवहार दिखाना इसके संकेत हो सकते हैं। नींद न आना, भूख न लगना, या बार-बार टॉयलेट जाना भी चिंता के लक्षण हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज न करें बल्कि धैर्य से समझने की कोशिश करें।
  2. घर पर तैयारी शुरू करें. स्कूल शुरू होने से 1-2 हफ्ते पहले से ही तैयारी करें। स्कूल का समय टेबल के हिसाब से सोने-उठने का समय सेट करें। स्कूल के बारे में सकारात्मक बातें करें - नए दोस्त मिलेंगे, मजेदार एक्टिविटी होंगी। बच्चे के साथ स्कूल की चीजें खरीदने जाएं ताकि वे उत्साहित महसूस करें। घर पर ही छोटे-छोटे अभ्यास करें जैसे अकेले बैठना, किताब पढ़ना।
  3. बातचीत का माहौल बनाएं. बच्चे से खुलकर बात करें कि उन्हें क्या डर लग रहा है। उनकी बात सुनें, उन्हें गलत न कहें। अगर वे कहते हैं कि डर लग रहा है तो समझाएं कि यह नॉर्मल है। अपने बचपन के अनुभव शेयर करें कि आपको भी पहले डर लगता था लेकिन बाद में अच्छा लगने लगा। बच्चे के सवालों का जवाब सच्चाई से लेकिन सकारात्मक तरीके से दें।
  4. पहले दिन की रणनीति. पहले दिन जल्दी उठकर बिना जल्दबाजी के तैयार होने का समय दें। बच्चे का पसंदीदा नाश्ता बनाएं। स्कूल जाते समय उत्साह दिखाएं, खुद चिंतित न दिखें। बच्चे को छोड़ने के बाद लंबी अलविदा न कहें, प्यार से हग देकर कॉन्फिडेंस के साथ जाने को कहें। वापस आने का समय बताएं और समय पर पिक अप करने पहुंचें।
  5. रूटीन बनाने में मदद करें. हर रोज का रूटीन बनाएं और उसे फॉलो करें। सुबह का एक फिक्स टाइम टेबल हो - उठना, तैयार होना, नाश्ता, स्कूल जाना। स्कूल से वापस आने पर भी रूटीन बनाएं। बच्चे से पूछें कि दिन कैसा था, क्या अच्छा लगा। होमवर्क का एक फिक्स टाइम रखें। रूटीन से बच्चे को सिक्यूरिटी का एहसास होता है।
  6. शिक्षक के साथ संपर्क बनाएं. क्लास टीचर से मिलकर बच्चे की स्थिति के बारे में बात करें। अगर बच्चे की कोई खास जरूरत है तो बताएं। टीचर से पूछें कि स्कूल में बच्चा कैसा बिहेव कर रहा है। नियमित फीडबैक लेते रहें। स्कूल की एक्टिविटी में हिस्सा लें जहां मुमकिन हो। टीचर के साथ पार्टनरशिप बनाकर बच्चे की मदद करें।