बच्चे को अपना टीचर पसंद नहीं आता - कैसे संभालें
जब आपका बच्चा अपने टीचर को नापसंद करे तो इन व्यावहारिक तरीकों से स्थिति को सुधारें।
- पहले बच्चे की बात सुनें. सबसे पहले बच्चे से शांति से बात करें और जानने की कोशिश करें कि वास्तव में क्या समस्या है। बिना किसी निर्णय के उनकी बातों को धैर्य से सुनें। कई बार बच्चे अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते। पूछें कि क्या कोई खास घटना हुई है या कोई व्यवहार उन्हें परेशान कर रहा है। बच्चे के नजरिए को समझना जरूरी है, चाहे वह सही हो या गलत।
- स्थिति को समझने की कोशिश करें. दूसरे माता-पिता से बात करके पता करें कि क्या उनके बच्चों की भी यही समस्या है। हो सकता है यह केवल आपके बच्चे की व्यक्तिगत समस्या हो। कक्षा में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी लेने की कोशिश करें। कभी-कभी टीचिंग स्टाइल और बच्चे के सीखने के तरीके में अंतर होता है। यह भी देखें कि क्या घर में कोई बदलाव या तनाव है जो इस समस्या को बढ़ा रहा हो।
- बच्चे को सकारात्मक दृष्टिकोण सिखाएं. बच्चे को समझाएं कि हर इंसान अलग होता है और शिक्षक भी इंसान हैं। उन्हें टीचर की अच्छी बातें खोजने के लिए प्रेरित करें। घर पर टीचर की निंदा न करें, बल्कि सम्मान की भावना दिखाएं। बच्चे को सिखाएं कि कैसे अलग-अलग लोगों के साथ तालमेल बिठाना जीवन की एक महत्वपूर्ण स्किल है। रोल-प्ले करके बच्चे को सिखाएं कि कैसे विनम्रता से अपनी बात कहनी है।
- टीचर से मिलकर बात करें. टीचर से व्यक्तिगत मुलाकात का समय लें। मुलाकात में आक्रामक या आरोप लगाने वाले रवैये से बचें। बातचीत को सकारात्मक अंदाज में शुरू करें और कहें कि आप दोनों मिलकर बच्चे की मदद करना चाहते हैं। टीचर का दृष्टिकोण समझें और पूछें कि आप घर से कैसे मदद कर सकते हैं। अगर कोई गलतफहमी है तो उसे दूर करने की कोशिश करें। कभी-कभी टीचर को भी बच्चे की खासियतों के बारे में जानकारी देने की जरूरत होती है।
- जरूरत पड़ने पर स्कूल प्रशासन से संपर्क करें. अगर टीचर से बात करने के बाद भी समस्या हल नहीं होती, तो स्कूल के प्रिंसिपल या काउंसलर से मिलें। अपनी चिंताओं को लिखकर रखें और तथ्यों के साथ बात करें। भावनाओं में बहकर गुस्से में बात न करें। स्कूल को समझाएं कि आप मिलकर समाधान खोजना चाहते हैं। अगर समस्या गंभीर है या बच्चे को नुकसान पहुंच रहा है, तो तुरंत कार्रवाई की मांग करें। दस्तावेज और बातचीत का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी हो सकता है।
- बच्चे को कोपिंग स्किल्स सिखाएं. बच्चे को सिखाएं कि कैसे मुश्किल परिस्थितियों में शांत रहना है। उन्हें बताएं कि अगर कोई समस्या हो तो वे आपसे या काउंसलर से बात कर सकते हैं। बच्चे को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सिखाएं और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकें बताएं। घर पर एक सुरक्षित माहौल बनाएं जहां बच्चा अपनी परेशानियां साझा कर सके। बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उनकी अच्छी चीजों की तारीफ करते रहें।