ADHD वाले बच्चे को स्कूल में सपोर्ट कैसे करें
ADHD वाले बच्चे की स्कूल में मदद के लिए व्यावहारिक तरीके और टिप्स।
- टीचर से बात करें और रिश्ता बनाएं. सबसे पहले अपने बच्चे के टीचर से खुली बातचीत करें। उन्हें बताएं कि आपके बच्चे को ADHD है और घर पर कौन सी चीजें काम करती हैं। टीचर से पूछें कि क्लास में आपका बच्चा कैसा व्यवहार करता है और कहां उसे मदद की जरूरत है। नियमित रूप से टीचर से मिलते रहें और बच्चे की प्रगति पर चर्चा करें। स्कूल काउंसलर या स्पेशल एजुकेशन टीम से भी संपर्क करें अगर जरूरत हो।
- दिनचर्या और संरचना बनाने में मदद करें. बच्चे के लिए घर और स्कूल दोनों में एक जैसी दिनचर्या बनाएं। सुबह स्कूल जाने से पहले का समय निर्धारित करें - कब उठना है, कब तैयार होना है, कब नाश्ता करना है। स्कूल बैग, किताबें और होमवर्क के लिए निश्चित जगह तय करें। बच्चे को टाइम टेबल और दैनिक कार्यों की सूची दें जिसे वह खुद देख सके। अचानक बदलाव से बचें और अगर कोई बदलाव हो तो पहले से बच्चे को बताएं।
- फोकस बढ़ाने की तकनीकें सिखाएं. बच्चे को छोटे-छोटे हिस्सों में काम करना सिखाएं। बड़े काम को छोटे भागों में बांटें और हर भाग पूरा करने पर इनाम दें। पढ़ाई के दौरान ब्रेक का इस्तेमाल करें - 15-20 मिनट पढ़ने के बाद 5 मिनट का ब्रेक। शांत जगह पर पढ़ाई करवाएं जहां कम ध्यान भटकाने वाली चीजें हों। टाइमर का इस्तेमाल करके बच्चे को समय का अहसास दिलाएं।
- होमवर्क में सहायता करें. होमवर्क के लिए रोज एक निश्चित समय और जगह तय करें। बच्चे के पास बैठें लेकिन उसका काम खुद न करें, बल्कि गाइड करें। कठिन विषयों को पहले करवाएं जब बच्चा फ्रेश हो। होमवर्क को छोटे हिस्सों में बांटें और हर हिस्सा पूरा होने पर प्रशंसा करें। अगर बच्चा बहुत परेशान हो जाए तो ब्रेक लें और बाद में दोबारा शुरू करें।
- स्कूल में विशेष व्यवस्था के लिए कहें. टीचर से कहें कि बच्चे को क्लास के आगे बिठाएं जहां कम ध्यान भटके। एक्जाम में अतिरिक्त समय की व्यवस्था करवाएं। जरूरत पड़ने पर बच्चे को शांत जगह पर टेस्ट देने की सुविधा मांगें। होमवर्क या असाइनमेंट में थोड़ी छूट की बात करें। क्लास में फिजिकल एक्टिविटी या मूवमेंट ब्रेक की व्यवस्था के लिए कहें।
- बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाएं. बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं को मनाएं और उसकी तारीफ करें। उसे बताएं कि ADHD कोई कमी नहीं है, बस दिमाग अलग तरीके से काम करता है। बच्चे की खूबियों और रुचि के क्षेत्रों को पहचानें और उन्हें बढ़ावा दें। अगर वह किसी दिन अच्छा काम नहीं कर पाए तो गुस्सा न करें, बल्कि समझाएं कि कल फिर कोशिश कर सकते हैं।