डिस्लेक्सिया वाले बच्चे की सफलता में कैसे करें मदद
डिस्लेक्सिया से जूझ रहे बच्चे को पढ़ाई और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रभावी तरीके।
- बच्चे की खूबियों को पहचानें. डिस्लेक्सिया वाले बच्चे अक्सर रचनात्मक, कलात्मक और समस्या समाधान में बेहतर होते हैं। उनकी इन विशेष क्षमताओं की पहचान करें और उनकी प्रशंसा करें। जब बच्चा अपनी मजबूत क्षेत्रों में सफलता पाता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। चित्रकारी, संगीत, खेल या हाथ से बनाने वाली चीजों में उनकी रुचि का पता लगाएं। इन गतिविधियों के माध्यम से वे अपनी पहचान बना सकते हैं और गर्व महसूस कर सकते हैं।
- घर में सहायक माहौल बनाएं. पढ़ाई के लिए एक शांत, व्यवस्थित जगह बनाएं जहां कोई भटकाव न हो। काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और समय-सारणी बनाएं। रंगीन फोल्डर, लेबल और कैलेंडर का इस्तेमाल करें ताकि बच्चा व्यवस्थित रह सके। होमवर्क के दौरान धैर्य रखें और गलतियों पर गुस्सा न होकर प्रोत्साहन दें। पढ़ने के लिए बड़े फॉन्ट वाली किताबें चुनें और जरूरत पड़ने पर ऑडियो बुक्स का भी सहारा लें।
- स्कूल के साथ मिलकर काम करें. बच्चे के टीचर से नियमित बातचीत करें और उन्हें डिस्लेक्सिया के बारे में जानकारी दें। IEP (व्यक्तिगत शिक्षा योजना) या 504 प्लान के लिए अनुरोध करें जिससे बच्चे को विशेष सुविधाएं मिल सकें। जैसे कि टेस्ट के लिए अतिरिक्त समय, मौखिक परीक्षा की सुविधा, या नोट लेने में सहायता। स्कूल काउंसलर और स्पेशल एजुकेशन टीम से भी जुड़ें। उनसे पूछें कि वे कक्षा में किन तरीकों का उपयोग करते हैं और घर में आप उन्हें कैसे जारी रख सकते हैं।
- पढ़ने और लिखने में मदद के तरीके. बच्चे के साथ रोज़ाना पढ़ने का समय निकालें, चाहे वह धीरे पढ़े या आप साथ मिलकर पढ़ें। मल्टी-सेंसरी तरीके अपनाएं - अक्षरों को हवा में लिखना, रेत में बनाना, या उंगली से मेज़ पर ट्रेस करना। फोनिक्स और ध्वनि-आधारित गेम खेलें। लिखने के लिए डिक्टेशन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें या टाइपिंग सिखाएं। बच्चे को जोर से पढ़ने के लिए प्रेरित करें, इससे समझ बेहतर होती है। पहली बार में परफेक्ट होने का दबाव न डालें, बल्कि कोशिश की सराहना करें।
- आत्मविश्वास और मानसिक सेहत का ख्याल. बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं का जश्न मनाएं और उसे बताएं कि आप उस पर गर्व करते हैं। उसे समझाएं कि डिस्लेक्सिया उसकी बुद्धि को प्रभावित नहीं करता, बस सीखने का तरीका अलग है। अगर बच्चा निराश या उदास दिखाई दे तो उससे खुलकर बात करें। दूसरे बच्चों से तुलना बिल्कुल न करें। उसे प्रेरणादायक कहानियां सुनाएं उन सफल लोगों की जिन्हें डिस्लेक्सिया था। बच्चे को सिखाएं कि वह अपनी जरूरतों के बारे में कैसे बात करे और मदद कैसे मांगे।