बच्चों से बिना लड़ाई-झगड़े के होमवर्क कैसे कराएं
घर में शांति बनाए रखते हुए बच्चों को होमवर्क करने के लिए प्रेरित करने के आसान तरीके।
- होमवर्क के लिए नियमित समय तय करें. हर दिन एक ही समय पर होमवर्क करने की आदत डालें। यह समय बच्चे के स्वभाव के अनुसार हो - कुछ बच्चे स्कूल से आकर तुरंत काम करना पसंद करते हैं, वहीं कुछ को खेलने के बाद पढ़ना अच्छा लगता है। एक बार समय तय हो जाए तो उसे बदलना न पड़े इसके लिए पूरे परिवार की दिनचर्या के अनुकूल बनाएं। समय की पाबंदी से बच्चे को पता रहता है कि कब क्या करना है।
- शांत और व्यवस्थित जगह बनाएं. होमवर्क के लिए घर में एक खास जगह तय करें जहां टीवी की आवाज़ न आए और भटकाव न हो। मेज़ पर सभी ज़रूरी चीज़ें - पेन, पेंसिल, रबर, स्केल - पहले से रख दें। अच्छी रोशनी और आरामदायक कुर्सी का इंतज़ाम करें। फ़ोन और टैबलेट को दूर रखें। इससे बच्चे का मन एकाग्र रहता है और काम जल्दी पूरा होता है।
- काम को छोटे हिस्सों में बांटें. एक साथ सारा होमवर्क देखकर बच्चे घबरा जाते हैं। सभी विषयों की सूची बनाएं और उन्हें प्राथमिकता के अनुसार व्यवस्थित करें। पहले आसान काम करवाएं ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े। हर विषय के बीच में 5-10 मिनट का ब्रेक दें। बड़े असाइनमेंट को कई दिनों में बांट कर करने की योजना बनाएं। इस तरह काम बोझ नहीं लगता।
- सकारात्मक माहौल बनाएं. होमवर्क के समय गुस्से या झिड़कने से बचें। जब बच्चा अटक जाए तो धैर्य रखें और उसकी मदद करें। गलतियों पर नाराज़ न हों, बल्कि समझाएं कि गलतियां सीखने का हिस्सा हैं। छोटी-छोटी सफलताओं की तारीफ करें - 'वाह, तुमने यह सवाल बिल्कुल सही किया!' कोशिश और मेहनत की प्रशंसा करें, सिर्फ़ नतीजों की नहीं।
- उचित मदद और प्रेरणा दें. होमवर्क बच्चे का काम है, आपका नहीं। सीधे जवाब न दें बल्कि सवाल पूछकर सोचने पर मजबूर करें - 'तुम्हें क्या लगता है, यहां क्या करना चाहिए?' जब बच्चा काम पूरा कर ले तो कुछ खुशी का काम करने दें - खेल, मनपसंद खाना या पारिवारिक गतिविधि। इनाम हमेशा ज़रूरी नहीं, बस आपका साथ और खुशी काफ़ी है।
- स्कूल के साथ संपर्क बनाए रखें. टीचर से नियमित बात करते रहें कि बच्चे की पढ़ाई कैसी चल रही है। होमवर्क की मात्रा या कठिनाई के बारे में जानकारी लें। अगर बच्चे को लगातार परेशानी हो रही है तो टीचर से सलाह लें। कभी-कभी पढ़ने के तरीके बदलने की ज़रूरत होती है। स्कूल और घर में एक जैसी नीति अपनाने से बच्चे को मदद मिलती है।