अंतर्मुखी बच्चे को स्कूल में सफल बनाने का तरीका

अंतर्मुखी बच्चों को स्कूल में आत्मविश्वास और सहजता से पढ़ाई करने में मदद करने के व्यावहारिक तरीके।

  1. अंतर्मुखी स्वभाव को समझें. अंतर्मुखी बच्चे शर्मीले नहीं बल्कि अकेले में ऊर्जा पाते हैं। ये बच्चे बोलने से पहले सोचते हैं, कम लोगों के साथ गहरे रिश्ते बनाना पसंद करते हैं, और भीड़-भाड़ से जल्दी थक जाते हैं। इन्हें शांत जगह पर काम करना अच्छा लगता है। यह समझना जरूरी है कि यह उनका प्राकृतिक स्वभाव है, कोई कमी नहीं।
  2. टीचर से बात करें. स्कूल साल की शुरुआत में अपने बच्चे के टीचर से मिलें। उन्हें बताएं कि आपका बच्चा अंतर्मुखी है और उसे कैसी मदद चाहिए। टीचर से कहें कि बच्चे को जवाब सोचने के लिए थोड़ा समय दें। क्लास में उसे तुरंत बोलने के लिए दबाव न डालें। छोटे ग्रुप में काम करने का मौका दें। यदि संभव हो तो बच्चे को शांत जगह पर बैठाएं।
  3. घर पर तैयारी करवाएं. स्कूल की गतिविधियों की घर पर पहले से तैयारी करवाएं। अगले दिन क्या पढ़ाया जाएगा, इसकी जानकारी पहले दे दें। प्रेजेंटेशन या स्पीच की घर पर प्रैक्टिस करवाएं। नए टॉपिक को घर पर पहले समझा दें ताकि क्लास में बच्चा आत्मविश्वास महसूस करे। स्कूल के नियम और दिनचर्या की जानकारी पहले से दें।
  4. सामाजिक कौशल बढ़ाएं. बच्चे को एक-दो अच्छे दोस्त बनाने के लिए प्रेरित करें। प्लेडेट्स का आयोजन करें ताकि बच्चा घर के आरामदायक माहौल में दूसरे बच्चों से मिल सके। उसे सिखाएं कि कैसे दूसरे बच्चों से बात शुरू करें। ग्रुप एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए धीरे-धीरे तैयार करें। उन गतिविधियों को चुनें जिनमें बच्चा रुचि रखता है।
  5. आत्मविश्वास बढ़ाएं. बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं की तारीफ करें। उसकी खूबियों जैसे गहराई से सोचना, धैर्य, और अच्छे से सुनना आदि को सराहें। उसे वह काम दें जिसमें वो अच्छा है ताकि आत्मविश्वास बढ़े। बच्चे को बताएं कि अंतर्मुखी होना बिल्कुल सामान्य और अच्छी बात है। किसी भी तरह से बाहरमुखी बनने का दबाव न डालें।
  6. स्कूल के बाद आराम दें. स्कूल के बाद बच्चे को अकेले में आराम करने का समय दें। उसे तुरंत ढेर सारे सवाल न पूछें या अतिरिक्त गतिविधियों में न डालें। शांत माहौल में उसकी बात सुनें। अगर बच्चा स्कूल की बातें न बताना चाहे तो जबरदस्ती न करें। उसे पसंदीदा काम करने दें जैसे पढ़ना, ड्रॉइंग, या संगीत सुनना।
  7. व्यावहारिक तकनीकें अपनाएं. बच्चे को सिखाएं कि असहज महसूस करने पर गहरी सांस लें। उसे कुछ आसान conversation starters सिखाएं। क्लास में हाथ उठाने या सवाल पूछने की प्रैक्टिस घर पर करवाएं। बच्चे के लिए एक 'सेफ पर्सन' स्कूल में बनवाएं जैसे कोई टीचर या स्टाफ मेंबर जिससे मुश्किल में मदद ले सके।