स्कूल में बदमाशी झेल रहे बच्चे की कैसे मदद करें
स्कूल में बुलिंग या बदमाशी का शिकार हो रहे बच्चे की पहचान करना और उनकी मदद करने के व्यावहारिक तरीके।
- बुलिंग के संकेतों को पहचानें. बच्चे हमेशा सीधे नहीं बताते कि वे परेशान हैं। इन संकेतों पर ध्यान दें: स्कूल जाने से मना करना, अचानक ग्रेड्स में गिरावट, खाना न खाना या ज्यादा खाना, रातको नींद न आना, चोट के निशान जिनकी वजह साफ न हो, स्कूल से सामान गुम होना, दोस्तों से मिलना बंद करना, या व्यवहार में अचानक बदलाव। अगर आपका बच्चा मूड में रहता है, डरा हुआ लगता है या अकेले रहना चाहता है, तो ये भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
- बच्चे से बात करने का सही तरीका. शांत वातावरण में बैठकर बात करें। पहले सामान्य सवाल पूछें जैसे 'स्कूल कैसा था?' फिर धीरे-धीरे खुले सवाल पूछें जैसे 'तुम्हारे दोस्त तुम्हारे साथ कैसा व्यवहार करते हैं?' धैर्य रखें और बच्चे को दोष न दें। जब वो बताए तो उसकी बात सुनें और समझाएं कि ये उसकी गलती नहीं है। बच्चे को भरोसा दिलाएं कि आप उसके साथ हैं और समस्या का हल निकालेंगे। गुस्सा न दिखाएं क्योंकि इससे बच्चा और डर सकता है।
- तुरंत करने वाले काम. सबसे पहले बच्चे को सुरक्षित महसूस कराएं। उसके साथ हुई हर घटना को लिखकर रखें - कब, कहां, क्या हुआ, कौन था। अगर कोई चोट है तो फोटो लें। स्कूल के टीचर या प्रिंसिपल से तुरंत मिलें और पूरी स्थिति बताएं। स्कूल से पूछें कि वे क्या कदम उठाने वाले हैं। यदि शारीरिक हिंसा हुई है तो डॉक्टर से चेकअप कराएं। बच्चे को अकेले स्कूल न भेजें जब तक समस्या का हल न निकले।
- बच्चे में आत्मविश्वास बढ़ाएं. बच्चे को सिखाएं कि परेशान करने वाले से आंख मिलाकर, साफ आवाज में 'बंद करो' या 'मुझे परेशान मत करो' कहे। उसे बताएं कि बुली से बचने के लिए भीड़ वाली जगह रहना चाहिए। दोस्त बनाने में मदद करें क्योंकि अकेले बच्चों को ज्यादा परेशान किया जाता है। घर पर रोल प्ले करें - अलग-अलग परिस्थितियों में क्या करना है इसका अभ्यास कराएं। बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करें ताकि उसका आत्मविश्वास बढ़े।
- स्कूल के साथ मिलकर काम करें. स्कूल के अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में रहें। उनसे पूछें कि बुलिंग रोकने के लिए क्या नीति है और कैसे लागू की जाती है। अगर पहली बार में कोई कार्रवाई नहीं होती तो दोबारा मिलें। लिखित में शिकायत दें और जवाब भी लिखित में मांगें। यदि क्लास टीचर से बात नहीं बनती तो प्रिंसिपल से मिलें। जरूरत हो तो अन्य अभिभावकों से भी बात करें। स्कूल में बुलिंग रोधी कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दें।
- घर में सहायक माहौल बनाएं. बच्चे के साथ ज्यादा समय बिताएं और उसकी पसंदीदा गतिविधियां करने दें। उसके शौक में भाग लेने को प्रोत्साहित करें जैसे खेल, संगीत या कला। घर में शांति और प्रेम का माहौल बनाए रखें। हर दिन स्कूल के बारे में पूछें कि दिन कैसा रहा। सकारात्मक बातें करें और बच्चे की अच्छाइयों की याद दिलाते रहें। परिवारजनों और रिश्तेदारों को स्थिति के बारे में बताएं ताकि सभी बच्चे का साथ दे सकें।
- गंभीर स्थितियों में क्या करें. यदि शारीरिक हिंसा हो रही है, धमकियां मिल रही हैं, या साइबर बुलिंग हो रही है तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। अगर स्कूल कोई कार्रवाई नहीं कर रहा तो शिक्षा विभाग में शिकायत करें। जरूरत हो तो स्कूल बदलने का विचार करें। बच्चे में अवसाद, आत्महत्या के विचार, या गंभीर व्यवहारिक बदलाव दिखें तो तुरंत मनोचिकित्सक से सलाह लें। सभी सबूत सुरक्षित रखें और हर बातचीत का रिकॉर्ड बनाए रखें।