दोनों दादा-दादी और नाना-नानी के साथ त्योहारों का समय कैसे बांटें

परिवार में शांति बनाए रखते हुए त्योहारों में दोनों तरफ के बुजुर्गों के साथ समय बिताने की व्यावहारिक गाइड।

  1. पहले से योजना बनाएं. त्योहारों से कम से कम एक महीने पहले दोनों तरफ के घर वालों से बात करें। कौन सा दिन कहां बिताना है, यह तय करें। अगर दीवाली 5 दिन की है तो 2-3 दिन एक तरफ और बाकी दूसरी तरफ बिताएं। मुख्य दिन को आधा-आधा बांट सकते हैं - सुबह एक जगह, शाम दूसरी जगह। अपना कैलेंडर बनाकर सबको बताएं ताकि बाद में कोई परेशानी न हो।
  2. साल दर साल अदला-बदली करें. हर साल मुख्य त्योहार का दिन बारी-बारी से दोनों घरों में मनाएं। इस साल दीवाली मायके में मनाईं तो अगली साल ससुराल में मनाएं। इससे दोनों तरफ को लगेगा कि आप उनका सम्मान करते हैं। छोटे त्योहार भी इसी तरह बांटें। एक लिस्ट बनाकर रखें कि कौन सा त्योहार कहां मनाया ताकि भूल न जाएं।
  3. बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखें. छोटे बच्चों का रूटीन बिगड़ने से वे चिड़चिड़ाते हैं। खाने-सोने का समय दोनों घरों में समझाएं। एक दिन में बहुत जगह न जाएं क्योंकि बच्चे थक जाते हैं। बच्चों के पसंदीदा खिलौने और कपड़े साथ रखें। अगर बच्चे स्कूल जाते हैं तो उनकी छुट्टियों के हिसाब से प्लान बनाएं।
  4. स्पष्ट संवाद रखें. दोनों तरफ के बुजुर्गों से खुलकर बात करें। बताएं कि आप दोनों से प्यार करते हैं और सबके साथ समय बिताना चाहते हैं। अगर कोई नाराजगी हो तो तुरंत समझाएं कि आपकी मजबूरी क्या है। गलतफहमी न होने दें। त्योहार से पहले फोन करके पूछें कि वे क्या प्लान कर रहे हैं ताकि आप तदनुसार अपना समय तय कर सकें।
  5. दूरी की समस्या का हल. अगर दोनों घर दूर हैं तो वीडियो कॉल का सहारा लें। जहां नहीं जा सकते वहां कॉल करके त्योहार की शुभकामनाएं दें और बच्चों से बात कराएं। मिठाई या उपहार कुरियर से भेजें। लंबे त्योहारों में आधा समय यहां, आधा वहां बिताएं। अगर ट्रेवल महंगा है तो दोनों परिवारों से अपनी स्थिति साझा करें।
  6. नए रीति-रिवाजों को अपनाएं. अपने घर में दोनों परिवारों के रीति-रिवाजों को मिलाकर त्योहार मनाएं। दोनों घरों के व्यंजन बनाएं। बच्चों को दोनों तरफ के त्योहारी गीत सिखाएं। कभी-कभी सभी को अपने घर न्योता दें और एक साथ मनाएं। इससे रिश्ते मजबूत होंगे और बच्चों को भी दोनों संस्कृतियों का फायदा मिलेगा।