अलग उम्र के बच्चों के लिए सोने का समय कैसे तय करें
विभिन्न आयु के बच्चों के लिए उचित सोने का समय निर्धारित करने की व्यावहारिक गाइड।
- बच्चों की उम्र के अनुसार नींद की जरूरत समझें. हर उम्र के बच्चों को अलग मात्रा में नींद चाहिए। छोटे बच्चों को ज्यादा नींद की जरूरत होती है। 2-3 साल के बच्चों को 11-14 घंटे, प्री-स्कूलर को 10-13 घंटे, स्कूली बच्चों को 9-11 घंटे और किशोरों को 8-10 घंटे नींद चाहिए। पहले अपने बच्चों की उम्र के हिसाब से जरूरी नींद के घंटे गिनें। फिर उनके जागने का समय देखकर पीछे की ओर गिनती करके सोने का समय तय करें। उदाहरण के लिए, अगर 5 साल के बच्चे को सुबह 7 बजे उठना है और उसे 11 घंटे नींद चाहिए, तो उसे रात 8 बजे सो जाना चाहिए।
- घर की दिनचर्या के अनुसार समय निर्धारण करें. अपने पारिवारिक माहौल को देखते हुए व्यावहारिक समय तय करें। अगर आप काम से देर से आते हैं तो बच्चों के साथ समय बिताने के लिए सोने का समय थोड़ा आगे बढ़ाना पड़ सकता है। सप्ताहांत में थोड़ी छूट दे सकते हैं लेकिन बहुत ज्यादा बदलाव न करें। छोटे बच्चों को पहले सुलाकर बड़े बच्चों के साथ अलग से समय बिता सकते हैं। सभी बच्चों के स्कूल का समय, गतिविधियां और होमवर्क का समय भी ध्यान में रखें।
- अलग-अलग बेडटाइम रूटीन बनाएं. छोटे बच्चों के लिए सरल रूटीन बनाएं जिसमें नहाना, कहानी सुनना और गले लगाना शामिल हो। बड़े बच्चों को स्वतंत्र रूटीन सिखाएं जैसे किताब पढ़ना, डायरी लिखना या शांत संगीत सुनना। अगर कमरा साझा है तो छोटे बच्चे को पहले सुलाएं और बड़े बच्चे को दूसरी जगह थोड़ी देर रखें। रूटीन में सभी स्क्रीन (मोबाइल, टीवी, टैबलेट) को सोने से एक घंटे पहले बंद करना शामिल करें। बड़े बच्चों को इसकी जिम्मेदारी दें कि वे छोटे भाई-बहनों को परेशान न करें।
- माहौल तैयार करें. सोने के समय पूरे घर में शांत माहौल बनाएं। लाइट्स धीमी या बंद करें और आवाज़ कम रखें। अगर बच्चों के कमरे अलग हैं तो हर कमरे को सोने के लिए अनुकूल बनाएं। कमरे का तापमान सही रखें और अंधेरा करें। बड़े बच्चों से कहें कि छोटे भाई-बहन सो रहे हों तो आवाज़ न करें। अगर जरूरत हो तो व्हाइट नॉइज़ मशीन या पंखे की आवाज़ का इस्तेमाल करें।
- नियमों में लगातारता बनाए रखें. एक बार समय तय करने के बाद उस पर अटल रहें। शुरुआत में बच्चे विरोध कर सकते हैं लेकिन धैर्य रखें। बड़े बच्चों को समझाएं कि छोटों को पहले सोना क्यों जरूरी है। छोटे बदलाव को लेकर बहुत सख्त न हों लेकिन नियम का सम्मान जरूर करवाएं। हर हफ्ते देखें कि समय सारणी कैसे काम कर रही है और जरूरत के अनुसार छोटे बदलाव करें। पूरे परिवार को इस दिनचर्या में शामिल करें ताकि सभी सहयोग करें।