भाई-बहन की लड़ाई को बिना हमेशा हस्तक्षेप किए कैसे सुलझाएं

बच्चों को खुद अपने झगड़े सुलझाना सिखाने के प्रभावी तरीके जानें।

  1. कब हस्तक्षेप करें और कब न करें. शारीरिक हिंसा, गाली-गलौच या किसी को नुकसान होने की स्थिति में तुरंत दखल दें। लेकिन सामान्य बहस-मुबाहिसे, खिलौना बांटने की समस्या या छोटी-मोटी शिकायतों में पहले बच्चों को खुद हल करने का मौका दें। 10-15 मिनट इंतज़ार करें। अगर लड़ाई बढ़ती जाए या कोई बच्चा बहुत परेशान हो तो सिर्फ तभी बीच में आएं।
  2. बच्चों को समस्या सुलझाने के तरीके सिखाएं. शांत समय में बच्चों से बात करें कि लड़ाई के दौरान क्या करना चाहिए। उन्हें सिखाएं कि गुस्से में आने पर पहले तीन गहरी सांस लें। फिर 'मैं चाहता हूं...' या 'मुझे लगता है...' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके अपनी बात कहें। साझा करना, बारी-बारी से खेलना और दूसरे की बात सुनना सिखाएं। छोटे बच्चों के लिए सरल नियम बनाएं जैसे 'मारना नहीं' या '5 मिनट तुम, फिर 5 मिनट मैं'।
  3. पक्ष न लें और न्यायाधीश न बनें. जब आपको दखल देना पड़े तो किसी का पक्ष न लें। 'किसने शुरू की' जानने की कोशिश न करें। बल्कि कहें 'मैं देख रहा हूं कि तुम दोनों परेशान हो। क्या हुआ?' दोनों की बात सुनें लेकिन फैसला न सुनाएं। उन्हें पूछें 'तुम्हें क्या लगता है इसका हल क्या हो सकता है?' बच्चों को अपना समाधान निकालने में मदद करें न कि रेडीमेड जवाब दें।
  4. सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहन दें. जब बच्चे शांति से अपनी समस्या सुलझाएं तो उनकी तारीफ़ जरूर करें। 'मैंने देखा तुमने बहुत अच्छे से साझा किया' या 'तुमने अपनी बहन की बात धैर्य से सुनी' जैसे विशिष्ट प्रशंसा करें। छोटे बच्चों को स्टीकर या खुशी का चार्ट दे सकते हैं। लड़ाई को नज़रअंदाज करना सीखें अगर वो हानिकारक नहीं है। कभी-कभी ध्यान न देना सबसे अच्छा समाधान होता है।
  5. घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाएं. रोज़ाना की दिनचर्या में हर बच्चे के लिए व्यक्तिगत समय निकालें। पारिवारिक नियम स्पष्ट रखें और सबके लिए एक समान लागू करें। खुद भी गुस्से को संयम से संभालने का उदाहरण दें। बच्चों के सामने दूसरों के साथ सम्मानपूर्वक बात करें। घर में ऐसी जगह बनाएं जहां कोई भी बच्चा अकेले शांत हो सके। हर बच्चे की अलग पहचान और खूबियों को सराहें।