बच्चे को नए सौतेले माता-पिता को स्वीकार करने में कैसे मदद करें
बच्चों को नए सौतेले माता-पिता के साथ रिश्ता बनाने में धैर्य और समझदारी से मदद करने के व्यावहारिक तरीके।
- धीरे-धीरे परिचय कराएं. बच्चे को अचानक से नए व्यक्ति के साथ रहने को न कहें। पहले छोटी मुलाकातें करवाएं - जैसे पार्क में मिलना या एक साथ खाना खाना। बच्चे को नए व्यक्ति के साथ खेलने या बात करने के लिए मजबूर न करें। उन्हें अपना समय दें कि वे अपनी गति से रिश्ता बनाएं। शुरुआत में नए सौतेले माता-पिता को दोस्त की तरह पेश करें, न कि तुरंत माता-पिता के रूप में।
- बच्चे की भावनाओं को समझें. बच्चा गुस्सा, डर, या उदासी महसूस कर सकता है - यह बिल्कुल सामान्य है। उनकी इन भावनाओं को गलत न कहें। बल्कि कहें 'मैं समझ सकता हूं कि तुम्हें अजीब लग रहा है।' बच्चे से पूछें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और उनकी बात धैर्य से सुनें। उन्हें यह भरोसा दिलाएं कि आपका प्यार उनके लिए कभी कम नहीं होगा। अगर वे अपने असली माता-पिता को याद कर रहे हैं तो उसे भी समझें।
- स्पष्ट नियम और सीमाएं बनाएं. शुरुआत में सौतेले माता-पिता को अनुशासन की जिम्मेदारी न दें। यह काम आपको ही करना चाहिए। धीरे-धीरे जब रिश्ता मजबूत हो जाए तब साझा जिम्मेदारियां बांटें। घर के नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। बच्चे को यह समझाएं कि नए व्यक्ति भी परिवार का सदस्य है और सभी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। लेकिन उन्हें तुरंत 'मां' या 'पापा' कहने के लिए मजबूर न करें।
- अकेले में समय बिताएं. अपने बच्चे के साथ अकेले में भी समय बिताना जरूरी है। हफ्ते में कम से कम एक बार सिर्फ आप और बच्चे का समय हो। इससे बच्चे को लगेगा कि वे अब भी आपके लिए खास हैं। नए सौतेले माता-पिता को भी बच्चे के साथ अकेले में समय बिताने का मौका दें, लेकिन जल्दबाजी न करें। इन गतिविधियों को मजेदार बनाएं - जैसे गेम खेलना, फिल्म देखना या खाना बनाना।
- एकजुट रहें. आप और आपके नए पार्टनर में बच्चों के सामने कोई मतभेद न दिखें। निजी में बात करें और फिर एक ही बात बच्चों से कहें। बच्चे को दो लोगों के बीच में फंसाने न दें। अगर बच्चा एक के खिलाफ दूसरे से शिकायत करे तो उसे प्रोत्साहित न करें। बल्कि उन्हें सिखाएं कि परिवार में सभी मिलकर समस्या का हल निकालते हैं।