घर में पहली बार पीरियड्स आने पर कैसे संभालें
बेटी के पहले पीरियड्स के समय माता-पिता के लिए व्यावहारिक गाइड और सहायता।
- पहले से तैयारी करें. अपनी बेटी से 8-10 साल की उम्र से ही पीरियड्स के बारे में खुली बातचीत शुरू करें। उसे बताएं कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। घर में हमेशा सैनिटरी पैड्स रखें और उसे दिखाएं कि ये कहाँ रखे हैं। उसके स्कूल बैग में भी एक-दो पैड्स रखवाएं। एक छोटी किट तैयार करें जिसमें पैड्स, अंडरवियर की एक जोड़ी और गीले टिश्यू हों।
- जब पीरियड्स आ जाएं तो तुरंत करें ये काम. सबसे पहले शांत रहें और अपनी बेटी को आश्वस्त करें कि सब कुछ सामान्य है। उसे गले लगाएं और बताएं कि वह अब बड़ी हो रही है। तुरंत सैनिटरी पैड लगाने में उसकी मदद करें। अगर कपड़ों पर दाग लग गया हो तो ठंडे पानी से धोएं। उसे दर्द या बेचैनी हो तो गर्म पानी की बोतल या हल्की मालिश से आराम दिलाएं।
- सही तरीके से सफाई सिखाएं. अपनी बेटी को दिन में 3-4 बार पैड बदलना सिखाएं, चाहे ब्लीडिंग कम हो या ज्यादा। उसे बताएं कि हर बार बाथरूम जाने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने चाहिए। प्राइवेट पार्ट्स को सिर्फ सादे पानी से धोना सिखाएं, साबुन का इस्तेमाल न करें। उसे सिखाएं कि इस्तेमाल किए गए पैड्स को अखबार में लपेटकर ही फेंकना चाहिए।
- भावनात्मक सहारा दें. इस समय आपकी बेटी को भावनात्मक सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उसकी हर बात को धैर्य से सुनें और उसके सवालों के जवाब दें। उसे बताएं कि दर्द होना या मूड स्विंग्स होना सामान्य है। घर के दूसरे सदस्यों से भी कहें कि वे समझदारी दिखाएं। उसे लगने दे कि वह किसी भी समस्या के लिए आप से बात कर सकती है।
- आहार और आराम का ख्याल रखें. पीरियड्स के दौरान आयरन से भरपूर खाना दें जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, और फल। उसे भरपूर पानी पीने के लिए कहें। अगर पेट में दर्द हो तो हल्की एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग करवाएं। पर्याप्त आराम दिलाएं और भारी काम न करने दें। दर्द ज्यादा हो तो डॉक्टर की सलाह पर दर्द निवारक दवा दे सकते हैं।