बच्चों को ऐसे पॉकेट मनी दें जो कुछ सिखाए

बच्चों को पॉकेट मनी देकर पैसे की समझ और जिम्मेदारी सिखाने के व्यावहारिक तरीके।

  1. पॉकेट मनी की शुरुआत कब करें. जब बच्चा 5-6 साल का हो जाए और पैसों को गिनना सीख जाए, तब पॉकेट मनी देना शुरू करें। इस उम्र में वे समझने लगते हैं कि चीजों की कीमत होती है। छोटे बच्चों के लिए हफ्ते में एक बार पैसे दें, बड़े बच्चों को महीने में एक बार दे सकते हैं।
  2. कितनी रकम दें. बच्चे की उम्र के हिसाब से पैसे दें - जैसे 6 साल के बच्चे को 20-30 रुपये हफ्ते में, 10 साल के बच्चे को 50-100 रुपये हफ्ते में। आपकी आर्थिक स्थिति के अनुसार रकम तय करें, ज्यादा या कम होना कोई बात नहीं। मुख्य बात यह है कि नियमित रूप से दें और एक जैसी रकम दें।
  3. काम के बदले पैसे देने का सही तरीका. घर के रोजाना के काम (जैसे अपना कमरा साफ रखना, खाना खाने के बाद प्लेट रखना) के लिए पैसे न दें। ये तो उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन अतिरिक्त काम जैसे कार धोना, बगीचे में मदद करना, या छोटे भाई-बहन की देखभाल के लिए अलग से पैसे दे सकते हैं।
  4. बचत की आदत सिखाएं. बच्चे को तीन डिब्बे या गुल्लक दें - एक खर्च के लिए, एक बचत के लिए, और एक दान के लिए। पॉकेट मनी मिलने पर इसे तीन हिस्सों में बांटने को कहें। शुरुआत में 60% खर्च, 30% बचत, और 10% दान का फॉर्मूला अच्छा रहता है।
  5. गलत खर्च से रोकने के तरीके. बच्चे के साथ बैठकर चर्चा करें कि वे अपने पैसे कैसे खर्च करना चाहते हैं। अगर वे कुछ गलत चीज खरीदना चाहते हैं तो मना करने के बजाय समझाएं कि यह क्यों सही नहीं है। कभी-कभी उन्हें अपनी गलतियों से सीखने दें, लेकिन नुकसानदेह चीजों के मामले में सख्ती बरतें।
  6. लक्ष्य बनाना सिखाएं. बच्चे से पूछें कि वे कौन सी चीज खरीदना चाहते हैं और उसकी कीमत पता करवाएं। फिर हिसाब लगाएं कि इसके लिए कितने दिन बचत करनी होगी। एक चार्ट बनाएं और हर हफ्ते उसमें बचत का हिसाब लिखें। जब लक्ष्य पूरा हो जाए तो साथ मिलकर वह चीज खरीदने जाएं।
  7. पैसों की गलत मांग से निपटें. अगर बच्चा पॉकेट मनी खत्म होने के बाद और पैसे मांगे तो अडिग रहें। समझाएं कि अगली बार पैसे तब मिलेंगे जब समय हो जाएगा। इससे वे अपने पैसों की योजना बनाना सीखेंगे। हां, अगर कोई जरूरी काम हो तो अतिरिक्त काम देकर अतिरिक्त पैसे दे सकते हैं।