पारिवारिक कैलेंडर कैसे बनाएं जो वास्तव में काम करे

एक व्यवहारिक पारिवारिक कैलेंडर बनाने का सरल तरीका जो सभी के काम आए।

  1. सही कैलेंडर प्रकार चुनें. पहले तय करें कि आपको डिजिटल कैलेंडर चाहिए या दीवार वाला। डिजिटल कैलेंडर में Google Calendar या Apple Calendar जैसे ऐप्स अच्छे हैं क्योंकि सभी फैमिली मेंबर इसे अपने फोन पर देख सकते हैं। अगर आपके घर में छोटे बच्चे हैं या आप चीजों को लिखना पसंद करते हैं, तो एक बड़ा दीवार कैलेंडर बेहतर रहेगा। आप चाहें तो दोनों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं - मुख्य चीजों के लिए डिजिटल और रोजाना के काम के लिए दीवार कैलेंडर।
  2. पारिवारिक मीटिंग करें और नियम बनाएं. सभी फैमिली मेंबर के साथ बैठकर तय करें कि कैलेंडर कैसे इस्तेमाल करना है। हर व्यक्ति को अलग रंग दें - माँ के लिए नीला, पापा के लिए हरा, बच्चों के लिए अलग-अलग रंग। तय करें कि कौन सी चीजें कैलेंडर में लिखनी हैं जैसे स्कूल के कार्यक्रम, डॉक्टर की अपॉइंटमेंट, त्योहार, जन्मदिन। एक नियम बनाएं कि जब भी कोई नई प्लान बने तो तुरंत कैलेंडर में लिख दें। हफ्ते में एक दिन सबके साथ मिलकर आने वाले हफ्ते के प्लान देखें।
  3. महत्वपूर्ण जानकारी व्यवस्थित करें. कैलेंडर में सिर्फ तारीख ही नहीं, जरूरी जानकारी भी लिखें। जैसे डॉक्टर की अपॉइंटमेंट के साथ समय और पता भी लिखें। बच्चों के स्कूल इवेंट के लिए क्या तैयारी करनी है, यह भी नोट करें। त्योहारों से 2-3 दिन पहले याददहानी लिखें कि क्या सामान लाना है। महत्वपूर्ण काम के लिए अलग निशान या स्टिकर का इस्तेमाल करें। हर महीने के शुरू में उस महीने की खास बातें ऊपर लिख दें।
  4. सबकी भागीदारी सुनिश्चित करें. कैलेंडर को ऐसी जगह रखें जहां सबकी नजर पड़े, जैसे रसोई या लिविंग रूम में। बच्चों को भी अपने काम खुद लिखने के लिए प्रोत्साहित करें। छोटे बच्चे अगर लिख नहीं सकते तो वे ड्राइंग या स्टिकर लगा सकते हैं। हर शाम खाना खाते समय कल के प्लान के बारे में बात करें। जब कोई काम पूरा हो जाए तो उसे काट दें या टिक मार्क लगाएं, इससे खुशी मिलती है। अगर कोई फैमिली मेंबर कैलेंडर इस्तेमाल करना भूल जाता है तो उसे प्यार से याद दिलाएं।
  5. नियमित अपडेट और समीक्षा करें. हर रविवार को आने वाले हफ्ते का कैलेंडर चेक करें और जरूरी तैयारी की लिस्ट बनाएं। महीने के अंत में देखें कि कैलेंडर कितना काम आया और क्या सुधार करना है। अगर कोई सिस्टम काम नहीं कर रहा तो उसे बदलने में झिझक न करें। बच्चों की उम्र के साथ कैलेंडर को भी अपडेट करते रहें। रिमाइंडर और अलार्म का इस्तेमाल करें ताकि महत्वपूर्ण चीजें भूलने न पाएं।