अपने बच्चे की खेल टीम को कोच कैसे करें

पैरेंट-कोच बनने के लिए जरूरी टिप्स और गाइडलाइन्स जो बच्चों के साथ सकारात्मक खेल अनुभव बनाने में मदद करेंगे।

  1. कोचिंग की शुरुआत से पहले तैयारी करें. सबसे पहले उस खेल के नियम और तकनीकों को समझें जिसे आप सिखाने वाले हैं। यूट्यूब वीडियो देखें, किताबें पढ़ें या दूसरे कोचों से बात करें। अपने बच्चे से अलग से बात करके साफ कर दें कि मैदान में आप उनके कोच हैं, पैरेंट नहीं। एक बेसिक फर्स्ट एड कोर्स जरूर करें और हमेशा अपने पास एक मेडिकल किट रखें। अन्य पैरेंट्स से भी मिलें और टीम के लक्ष्य साझा करें।
  2. प्रैक्टिस सेशन प्लान करना. हर प्रैक्टिस के लिए पहले से प्लान बनाएं। 5-10 मिनट वार्म-अप, 20-30 मिनट स्किल प्रैक्टिस, 15-20 मिनट गेम प्ले या स्क्रिमेज, और 5 मिनट कूल-डाउन का पैटर्न फॉलो करें। छोटे बच्चों के लिए प्रैक्टिस 45 मिनट से ज्यादा न रखें। हर सेशन में कुछ नया और मजेदार एक्टिविटी जरूर शामिल करें। बच्चों को लगातार पानी पीने के लिए कहें और उन्हें ब्रेक दें।
  3. सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार. हर बच्चे को बराबर खेलने का मौका दें, चाहे वे कितने भी अच्छे या कमजोर हों। अपने बच्चे को दूसरों से ज्यादा फेवर न करें। जो बच्चे धीरे सीखते हैं, उनके साथ धैर्य रखें और उन्हें प्रेरित करते रहें। हर बच्चे की मेहनत की तारीफ करें, सिर्फ जीत की नहीं। टीम वर्क और स्पोर्ट्समैनशिप को बढ़ावा दें।
  4. गेम डे की रणनीति. गेम से पहले बच्चों को शांत और आत्मविश्वास से भरा रखें। जीत से ज्यादा अच्छा खेलने पर फोकस करें। अगर टीम हार रही है तो भी बच्चों का हौसला बढ़ाते रहें। रेफरी के फैसलों का सम्मान करें और बच्चों को भी यही सिखाएं। हार-जीत के बाद दोनों स्थितियों में बच्चों के साथ सकारात्मक बातचीत करें।
  5. पैरेंट्स और बच्चों के साथ कम्यूनिकेशन. अन्य पैरेंट्स के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें। व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर प्रैक्टिस और गेम की जानकारी शेयर करें। बच्चों से उनकी भाषा में बात करें, चिल्लाएं नहीं। अगर कोई बच्चा नियम नहीं मान रहा तो प्यार से समझाएं। अगर कोई समस्या है तो पहले पैरेंट्स से प्राइवेट में बात करें।
  6. सुरक्षा को प्राथमिकता दें. हमेशा बच्चों की सेफ्टी को पहले रखें। मौसम खराब हो तो प्रैक्टिस कैंसल करने से न झिझकें। चोट लगने पर तुरंत बच्चे की जांच करें और जरूरत हो तो पैरेंट्स को सूचना दें। सभी बच्चों के मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी रखें। उचित उपकरण और प्रोटेक्टिव गियर का इस्तेमाल सुनिश्चित करें।