बच्चे के पहले पैनिक अटैक से कैसे निपटें

बच्चे के पहले पैनिक अटैक के दौरान तुरंत मदद करने और भविष्य की तैयारी के लिए व्यावहारिक गाइड।

  1. पैनिक अटैक की पहचान करें. पैनिक अटैक के मुख्य लक्षणों में तेज़ सांस आना, दिल की धड़कन बढ़ना, पसीना आना, कंपकंपी, चक्कर आना या मतली शामिल है। बच्चा घबराहट से कह सकता है कि उसे सांस नहीं आ रही या वह मरने वाला है। यह अचानक शुरू होता है और आमतौर पर 10-20 मिनट में अपने आप ठीक हो जाता है।
  2. तुरंत शांत करने वाले कदम उठाएं. सबसे पहले खुद शांत रहें और अपनी आवाज़ धीमी व स्थिर रखें। बच्चे के पास बैठें या घुटनों के बल आकर उसकी आंखों के स्तर पर आ जाएं। कहें 'मैं यहां हूं, तुम सुरक्षित हो।' बच्चे को किसी शांत जगह ले जाएं जहां भीड़ न हो। ढीले कपड़े पहनाएं और ताज़ी हवा दिलवाएं।
  3. सांस की तकनीक सिखाएं. बच्चे को धीरे-धीरे सांस लेना सिखाएं। कहें 'मेरे साथ सांस लो - 4 तक गिनती करते हुए सांस अंदर लो, 4 तक रोको, फिर 4 तक गिनते हुए छोड़ो।' आप खुद भी यह करके दिखाएं। छोटे बच्चों के लिए 'फूल सूंघो और मोमबत्ती बुझाओ' जैसे खेल का उपयोग करें।
  4. ध्यान भटकाने की तकनीकें. 5-4-3-2-1 तकनीक का उपयोग करें: 5 चीज़ें जो दिख रही हैं, 4 चीज़ें जो छू सकते हैं, 3 आवाज़ें जो सुनाई दे रही हैं, 2 खुशबू, और 1 स्वाद के बारे में पूछें। छोटे बच्चों के साथ रंग गिनना, गाना गाना या उनके पसंदीदा खिलौने के बारे में बात करना फायदेमंद हो सकता है।
  5. गलत धारणाओं से बचें. बच्चे से न कहें 'घबराओ मत' या 'यह तुम्हारे दिमाग में है।' उसकी परेशानी को कम न आंकें या नाटक न समझें। जल्दबाजी में दवा न दें या ज़बरदस्ती पानी न पिलाएं। बच्चे को अकेला न छोड़ें और न ही डांटें।
  6. अटैक के बाद की देखभाल. जब बच्चा शांत हो जाए, तो उसे आराम करने दें। प्यार से उसे समझाएं कि जो हुआ वह सामान्य है और वह सुरक्षित है। बच्चे की बात सुनें कि उसे कैसा लगा। हल्का नाश्ता और पानी दे सकते हैं। उस दिन कोई भारी गतिविधि न करवाएं।