बच्चे को स्पीच थेरेपी की ज़रूरत है या नहीं - कैसे पहचानें
जानिए कि आपके बच्चे के बोलने में कोई समस्या है या नहीं और कब स्पीच थेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।
- बोलने के विकास में देरी के मुख्य संकेत. अगर आपका बच्चा अपनी उम्र के अनुसार शब्द नहीं बोल रहा है तो यह चिंता की बात हो सकती है। जैसे 12 महीने तक कोई शब्द न बोलना, 18 महीने तक 'मम्मी' या 'पापा' न कहना, या 2 साल तक दो शब्द मिलाकर न बोलना। यदि बच्चा पहले बोले गए शब्दों को भूल जाए या बोलना बंद कर दे तो भी सावधान रहें। इसके अलावा अगर बच्चे की बात दूसरे लोग समझ नहीं पा रहे हैं तो भी मदद की ज़रूरत हो सकती है।
- उच्चारण और स्पष्टता की समस्याएं. कुछ आवाज़ें बच्चे के लिए कठिन होती हैं, लेकिन अगर 3 साल के बाद भी परिवार के लोग बच्चे की बात समझ नहीं पा रहे हैं तो परेशानी हो सकती है। अक्षरों को गलत बोलना, जैसे 'क' की जगह 'त' बोलना, या कुछ आवाज़ों को छोड़ देना भी चिंता का विषय है। यदि बच्चा हकलाता है, शब्दों को खींचकर बोलता है, या बोलते समय चेहरे पर तनाव दिखता है तो भी ध्यान देने की ज़रूरत है।
- समझने और संवाद करने की कमी. सिर्फ बोलना ही नहीं, समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर बच्चा सरल निर्देशों को नहीं समझता, अपने नाम पर प्रतिक्रिया नहीं देता, या आंखों का संपर्क नहीं बनाता है तो चिंता की बात है। संकेतों का उपयोग न करना, जैसे हाथ हिलाकर बाय-बाय न कहना या इशारे से चीज़ें न मांगना भी समस्या के संकेत हो सकते हैं। सामाजिक परिस्थितियों में बातचीत न करना या सवालों का जवाब न देना भी ध्यान देने योग्य है।
- शारीरिक संकेत जिन पर ध्यान दें. कुछ शारीरिक लक्षण भी स्पीच थेरेपी की ज़रूरत बता सकते हैं। अगर बच्चे का मुंह हमेशा खुला रहता है, लार बहुत आती है, या खाना निगलने में परेशानी होती है तो यह मुंह की मांसपेशियों की कमज़ोरी हो सकती है। बार-बार कान के संक्रमण या सुनाई देने की समस्या भी बोलने को प्रभावित कर सकती है। यदि बच्चा अपनी आवाज़ बहुत धीमी या तेज़ रखता है, या आवाज़ में कर्कशता है तो भी जांच कराएं।