स्कूल में दीर्घकालिक बीमारी वाले बच्चे की सहायता कैसे करें
पुरानी बीमारी से जूझ रहे बच्चे को स्कूल में सफल बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव।
- स्कूल के साथ खुली बातचीत करें. अपने बच्चे की स्थिति के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल, क्लास टीचर और स्कूल नर्स को विस्तार से बताएं। बच्चे की बीमारी कैसे उसकी दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करती है, इसकी जानकारी दें। डॉक्टर से लिखित रिपोर्ट लेकर स्कूल को दें जिसमें बच्चे की जरूरतों का उल्लेख हो। नियमित बैठकें करके बच्चे की प्रगति पर चर्चा करते रहें।
- व्यक्तिगत शिक्षा योजना बनवाएं. स्कूल से बात करके अपने बच्चे के लिए विशेष शिक्षा योजना तैयार करवाएं। इसमें बच्चे की शारीरिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई की व्यवस्था हो। अगर बच्चा कभी स्कूल नहीं आ सकता तो घर से पढ़ाई की सुविधा मांगें। परीक्षा के दौरान अतिरिक्त समय या विशेष व्यवस्था की मांग करें। जरूरत पड़ने पर दवा लेने या आराम करने की सुविधा सुनिश्चित करें।
- बच्चे को मानसिक सहारा दें. अपने बच्चे से उसकी परेशानियों के बारे में नियमित बात करें। उसे समझाएं कि बीमारी उसकी गलती नहीं है। बच्चे की छोटी-छोटी सफलताओं की तारीफ करें। अन्य बच्चों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने में उसकी मदद करें। घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखें और बच्चे को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने के लिए प्रोत्साहित करें।
- आपातकालीन योजना तैयार रखें. स्कूल के साथ मिलकर आपातकाल की स्थिति के लिए पूरी योजना बनाएं। स्कूल को अपने और डॉक्टर के संपर्क नंबर दें। बच्चे की दवाइयां स्कूल में सुरक्षित रखवाएं। टीचरों को बताएं कि अगर बच्चे की तबीयत बिगड़े तो क्या करना है। नियमित रूप से इस योजना को अपडेट करते रहें और नए टीचरों को भी इसकी जानकारी दें।
- घर और स्कूल के बीच तालमेल बनाएं. रोज स्कूल से बच्चे की गतिविधियों के बारे में पूछें। अगर बच्चा स्कूल से छुट्टी लेता है तो पढ़ाई का काम घर लाने की व्यवस्था करें। टीचर के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें। बच्चे के दोस्तों के माता-पिता को भी उसकी स्थिति के बारे में जरूरी जानकारी दें ताकि वे समझदारी से पेश आ सकें।