स्कूल में दमा से पीड़ित बच्चे की देखभाल कैसे करें
स्कूल में दमा वाले बच्चे की सुरक्षा और देखभाल के लिए अभिभावकों की व्यावहारिक गाइड।
- स्कूल को दमे की पूरी जानकारी दें. अपने बच्चे के दमे की स्थिति के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल, क्लास टीचर और स्कूल नर्स को विस्तार से बताएं। डॉक्टर से लिखित रिपोर्ट और दवाओं की सूची तैयार करवाकर स्कूल को दें। बच्चे के दमे के ट्रिगर्स (जैसे धूल, पराग, ठंड) की जानकारी स्पष्ट रूप से साझा करें। एक्शन प्लान तैयार करें जिसमें लिखा हो कि दमे का दौरा पड़ने पर क्या करना है।
- दवाइयों की व्यवस्था करें. बच्चे का इन्हेलर हमेशा स्कूल में उपलब्ध रखें। स्कूल की नीति के अनुसार, दवा को स्कूल नर्स के पास या बच्चे के पास रखने की अनुमति लें। इन्हेलर की एक्सपायरी डेट नियमित रूप से चेक करें और समय पर बदलें। रिज़र्व इन्हेलर भी स्कूल में रखें। बच्चे को इन्हेलर का सही इस्तेमाल सिखाएं और स्कूल स्टाफ को भी बताएं।
- क्लासरूम का माहौल दमा-फ्रेंडली बनाएं. टीचर से अनुरोध करें कि बच्चे को धूल भरी जगह न बैठाएं और खिड़की के पास की सीट दें जहां ताज़ी हवा आती हो। क्लासरूम में चॉक की धूल, परफ्यूम या स्ट्रॉन्ग केमिकल्स से बचाव करें। बच्चे को फिजिकल एक्टिविटी से पहले इन्हेलर लेने की अनुमति दिलवाएं। पेट्स या फूलों से एलर्जी हो तो टीचर को बताएं।
- खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए तैयारी. पीई टीचर को बच्चे के दमे के बारे में जानकारी दें। एक्सरसाइज़ से पहले वार्म-अप करने और इन्हेलर लेने की अनुमति दिलवाएं। बच्चे को सिखाएं कि सांस फूलने पर तुरंत रुक जाए और टीचर को बताए। मौसम के हिसाब से खेल की गतिविधियों में बदलाव की जरूरत हो तो स्कूल से बात करें।
- इमरजेंसी के लिए तैयार रहें. अपना फोन नंबर, ऑफिस नंबर और बैकअप कॉन्टैक्ट स्कूल को दें। दमे का गंभीर दौरा पड़ने पर स्कूल को तुरंत एंबुलेंस बुलाने के लिए कहें। बच्चे के दोस्तों और टीचर्स को बताएं कि दमे का दौरा पड़ने पर कैसे पहचानें। स्कूल के पास आपका पारिवारिक डॉक्टर का नंबर हो।
- नियमित फॉलो-अप और संवाद. महीने में कम से कम एक बार टीचर से बात करके जानें कि बच्चा स्कूल में कैसा महसूस कर रहा है। दमे की स्थिति में कोई बदलाव हो तो तुरंत स्कूल को अपडेट करें। बच्चे से रोज़ाना पूछें कि स्कूल में कोई समस्या तो नहीं हुई। डॉक्टर की रिपोर्ट का नया वर्जन स्कूल को दें।