लंबे समय तक दर्द से परेशान बच्चे की मदद कैसे करें
पुराने दर्द से जूझ रहे बच्चे को शारीरिक और मानसिक सहारा देने के व्यावहारिक तरीके जानें।
- बच्चे के दर्द को समझें और स्वीकार करें. सबसे पहले बच्चे के दर्द को गंभीरता से लें। उसकी बात सुनें और यह न कहें कि 'कुछ नहीं है' या 'बस मन की बात है'। बच्चे से पूछें कि दर्द कैसा लगता है - क्या यह तेज है, हल्का है, या जलन जैसा है। एक दर्द डायरी बनाएं जिसमें दिन भर में कब और कितना दर्द होता है। यह जानकारी डॉक्टर के लिए बहुत उपयोगी होगी।
- दैनिक दिनचर्या में बदलाव करें. बच्चे की दिनचर्या को दर्द के अनुसार ढालें। दर्द कम होने पर हल्की गतिविधियां कराएं जैसे धीरे-धीरे टहलना या स्ट्रेचिंग। दर्द ज्यादा होने पर आराम दें लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय न रहने दें। नियमित नींद का समय बनाएं क्योंकि अच्छी नींद दर्द को कम करने में मदद करती है। खाने में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें दें और पर्याप्त पानी पिलाएं।
- दर्द से राहत की तकनीकें सिखाएं. बच्चे को सांस की गहरी तकनीक सिखाएं - धीरे-धीरे सांस अंदर लें और धीरे छोड़ें। मांसपेशियों को ढीला करने की विधि बताएं - शरीर के हर हिस्से को तनाव देकर फिर छोड़ें। हल्की मालिश या गर्म सिकाई दर्द वाली जगह पर करें (डॉक्टर की सलाह पर)। ध्यान या योग की सरल तकनीकें सिखाएं जो मन को शांत रखने में मदद करती हैं।
- मानसिक सहारा दें. बच्चे की भावनाओं को समझें - दर्द की वजह से वह गुस्सा, उदास या परेशान हो सकता है। उसे बताएं कि ये सभी भावनाएं सामान्य हैं। बच्चे के साथ बात करें कि वह कैसा महसूस कर रहा है और उसकी बात धैर्य से सुनें। परिवार के अन्य सदस्यों को भी समझाएं कि बच्चे के साथ कैसे व्यवहार करना है। बच्चे को आशा दिलाएं कि स्थिति बेहतर होगी।
- स्कूल और सामाजिक गतिविधियों में संतुलन. बच्चे के शिक्षकों से बात करें और उन्हें बच्चे की स्थिति के बारे में बताएं। जरूरत पड़ने पर स्कूल में विशेष व्यवस्था की मांग करें जैसे ज्यादा ब्रेक या कम होमवर्क। बच्चे को दोस्तों से मिलने दें लेकिन उसकी सीमाओं का ध्यान रखें। ऐसी गतिविधियां ढूंढें जिनमें बच्चा भाग ले सके और खुश रह सके।
- परिवार की देखभाल भी जरूरी. माता-पिता को भी अपना ख्याल रखना चाहिए क्योंकि तनाव में रहकर आप बच्चे की बेहतर मदद नहीं कर सकते। अन्य बच्चों की जरूरतों को भी नज़रअंदाज न करें। परिवार के सदस्यों से मदद लें और जरूरत पड़ने पर ब्रेक लें। सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें जहां आप दूसरे माता-पिता से अनुभव साझा कर सकें।