बच्चा सिर्फ स्नैक्स खाना चाहता है तो क्या करें
जब आपका बच्चा सिर्फ स्नैक्स खाना चाहता है और खाना नहीं खाता, तो इन व्यावहारिक तरीकों से समस्या हल करें।
- स्नैकिंग की आदत क्यों बनती है. बच्चे स्नैक्स इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि ये मीठे, नमकीन और तुरंत मिल जाते हैं। जब हम परेशान होकर बार-बार स्नैक्स देते हैं, तो बच्चा समझ जाता है कि खाना न खाने पर उसे पसंदीदा चीज़ मिल जाएगी। कई बार भूख का सही समय न होना या घर में स्नैक्स आसानी से उपलब्ध होना भी इस समस्या की वजह बनता है।
- खाने का समय निश्चित करें. दिन में तीन मुख्य भोजन और दो स्वस्थ स्नैक्स का समय तय करें। भोजन के बीच कम से कम 2-3 घंटे का अंतर रखें ताकि बच्चे को सही समय पर भूख लगे। स्नैक टाइम से एक घंटा पहले कुछ भी न दें, चाहे बच्चा कितना भी रोए। समय की पाबंदी से बच्चे का पेट खाली होगा और वो खाना खाने के लिए तैयार होगा।
- घर से अनहेल्दी स्नैक्स हटाएं. जो चीज़ें घर में नहीं होंगी, उसकी मांग भी कम होगी। चिप्स, कुकीज़, मिठाई जैसी चीज़ों को बच्चे की पहुंच से हटा दें। इनकी जगह फल, सूखे मेवे, भुना चना, दलिया से बने लड्डू जैसे स्वस्थ विकल्प रखें। शुरुआत में बच्चा परेशान होगा लेकिन धीरे-धीरे वो इन्हीं चीज़ों को पसंद करने लगेगा।
- स्वस्थ स्नैक्स तैयार करें. घर पर ही स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक्स बनाएं जैसे ओट्स के कुकीज़, फ्रूट चाट, दही में फल मिलाकर, चीला, पोहा या उपमा। बच्चे को इन्हें बनाने में शामिल करें - फल काटने दें या सामान मिलाने में मदद लें। जब बच्चे खुद बनाने में शामिल होते हैं तो वो खाने में भी दिलचस्पी दिखाते हैं।
- मुख्य खाने को आकर्षक बनाएं. खाने को रंग-बिरंगा और दिलचस्प बनाएं। रोटी को अलग shape में काटें, सब्जी में अलग-अलग रंग की सब्जियां मिलाएं। छोटे portions परोसें ताकि बच्चा overwhelmed न हो। बच्चे के साथ बैठकर खाएं और खाने के दौरान उसकी पसंदीदा कहानी या गाना चलाएं। खाना खत्म करने पर तारीफ करें, लेकिन ज़बरदस्ती न करें।
- धैर्य रखें और consistent रहें. यह बदलाव रातों-रात नहीं आएगा। कम से कम 2-3 हफ्ते लगातार कोशिश करनी पड़ेगी। बच्चे के रोने या मान न मानने पर हार न मानें। सभी family members को same approach अपनाना चाहिए। दादा-दादी या घर के अन्य सदस्यों को भी समझाएं कि छुपकर स्नैक्स न दें। consistency से ही यह आदत बदलेगी।