शिशु को ठोस आहार खिलाना कैसे शुरू करें

शिशु को दूध से ठोस आहार की ओर ले जाने का सुरक्षित और आसान तरीका जानें।

  1. ठोस आहार शुरू करने के संकेत पहचानें. शिशु में ये संकेत दिखने पर ठोस आहार शुरू करने का समय हो सकता है: बिना सहारे के बैठ सकता है, खाने में दिलचस्पी दिखाता है, चम्मच या खाना देखकर मुंह खोलता है, अपनी जीभ से खाना बाहर नहीं निकालता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिशु कम से कम 6 महीने का हो गया हो। जल्दबाजी न करें और शिशु के तैयार होने का इंतजार करें।
  2. पहले खाद्य पदार्थ चुनें. सबसे पहले एक समय में केवल एक नया खाना दें। दाल का पानी, चावल का मांड, केला, सेब की प्यूरी, गाजर की मसली हुई प्यूरी से शुरुआत करें। हर नया खाना 3-4 दिन तक दें और किसी भी एलर्जी के संकेत देखें जैसे रैश, उल्टी, या दस्त। मिठाई, नमक, शहद, छोटे कठोर टुकड़े (मेवे, अंगूर) न दें। खाना हमेशा ताजा और साफ हाथों से बनाएं।
  3. खिलाने की तकनीक. शुरुआत में दिन में एक बार, छोटी चम्मच से खिलाएं। शिशु को हाई चेयर या गोद में सीधा बिठाकर खिलाएं। पहले एक-दो चम्मच से शुरू करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। जबरदस्ती कभी न करें - अगर शिशु मुंह बंद कर ले या मना कर दे तो रुक जाएं। खाने का समय खुशी का हो, तनाव का नहीं। शिशु को अपने हाथों से भी खाने दें, यह सीखने का हिस्सा है।
  4. धीरे-धीरे आगे बढ़ें. 2-3 हफ्तों बाद दिन में दो बार खाना दें, फिर तीन बार। 8-9 महीनों में मसला हुआ खाना दें जिसमें छोटे-छोटे टुकड़े हों। 10-12 महीनों में छोटी उंगली के आकार के टुकड़े दें जो शिशु अपने हाथों से पकड़कर खा सके। हमेशा दूध पिलाना जारी रखें - पहले साल में दूध मुख्य आहार होता है। पानी छोटे घूंट में दें, लेकिन ज्यादा मात्रा में नहीं।
  5. सामान्य समस्याओं से निपटें. अगर शिशु खाना नहीं खाता तो परेशान न हों। कई बार कोशिश करनी पड़ती है। खाना खेल-खेल में खाने दें और गंदगी की चिंता न करें। कब्ज होने पर पानी दें और रेशेदार खाना जैसे दलिया दें। दस्त होने पर नया खाना बंद करें और डॉक्टर से सलाह लें। हर बच्चा अलग गति से सीखता है, तुलना न करें। धैर्य रखें और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।