बच्चों को धीरे-धीरे तीखा खाना कैसे सिखाएं
बच्चों को सुरक्षित और आसान तरीके से तीखे खाने की आदत डालने के लिए व्यावहारिक सुझाव।
- शुरुआत कब और कैसे करें. 6 महीने के बाद जब बच्चे ठोस आहार शुरू करते हैं, तब हल्के मसालों से शुरुआत करें। सबसे पहले हींग, जीरा, धनिया पाउडर जैसे मिल्ड मसाले दें। इनमें तीखापन नहीं होता लेकिन स्वाद होता है। एक बार में एक ही नया मसाला शुरू करें और 3-4 दिन तक देखें कि कोई एलर्जी तो नहीं है। हरी मिर्च या काली मिर्च कम से कम 1 साल की उम्र के बाद ही दें।
- मसालों का क्रम. पहले चरण में हींग, हल्दी, जीरा पाउडर और धनिया पाउडर दें। दूसरे चरण में काली मिर्च का बहुत हल्का छिड़काव करें। तीसरे चरण में अदरक-लहसुन का पेस्ट मिलाएं। चौथे चरण में हरी मिर्च की बहुत छोटी मात्रा शुरू करें। लाल मिर्च सबसे आखिर में और बहुत कम मात्रा में दें। हर नए मसाले को कम से कम 2-3 हफ्ते तक दें, फिर अगला शुरू करें।
- सही मात्रा और तरीका. शुरुआत में चुटकीभर से भी कम मसाला दें। बच्चे की प्रतिक्रिया देखें - अगर मुंह बना रहे हैं या खाना छोड़ रहे हैं तो और कम करें। मसालों को दूध, दही या घी के साथ मिलाकर दें ताकि तीखापन कम लगे। खाने के दौरान पानी या दूध पास में रखें। खाना खिलाते समय बच्चे के चेहरे के भाव देखें और उसी के अनुसार मात्रा तय करें।
- प्रतिक्रिया को समझें और संभालें. अगर बच्चा खांसने लगे तो तुरंत दूध या पानी दें। मुंह बनाना या थोड़ा रोना सामान्य है, लेकिन ज्यादा परेशान हों तो मसाला कम करें। अगर बच्चे को दस्त, उल्टी या पेट दर्द हो तो मसालेदार खाना रोक दें। कुछ दिन बाद और भी कम मात्रा से दोबारा कोशिश करें। हर बच्चे की पाचन शक्ति अलग होती है, इसलिए जल्दबाजी न करें।
- खुद का उदाहरण दें. बच्चों के सामने आप भी वही खाना खाएं जो उन्हें दे रहे हैं। उन्हें बताएं कि यह कितना स्वादिष्ट है। खुश होकर खाएं ताकि बच्चे भी खुशी से खाना सीखें। अगर कोई मसाला पसंद नहीं आया तो जबर्दस्ती न करें। कुछ दिन बाद दूसरे तरीके से वही मसाला दें। बच्चों की पसंद-नापसंद का सम्मान करते हुए धीरे-धीरे नए स्वाद सिखाएं।