कैसे जानें कि आपका किशोर डिप्रेशन से जूझ रहा है
किशोरावस्था में डिप्रेशन के संकेतों को पहचानने और अपने बच्चे की मदद करने की पूरी गाइड।
- व्यवहार में आने वाले बदलाव पर ध्यान दें. अगर आपका बच्चा पहले खुश और सक्रिय था और अब वो हमेशा उदास या चिड़चिड़ाया रहता है, तो यह चिंता की बात है। दोस्तों से मिलना-जुलना बंद कर देना, अकेले रहना पसंद करना, या पसंदीदा गतिविधियों में रुचि न लेना भी संकेत हैं। अगर यह व्यवहार दो हफ्ते या ज्यादा समय से जारी है, तो इसे हल्के में न लें। नींद के पैटर्न में बदलाव भी देखें - बहुत ज्यादा सोना या फिर बिल्कुल नींद न आना दोनों ही चिंताजनक हैं।
- शारीरिक लक्षणों को पहचानें. डिप्रेशन सिर्फ मानसिक नहीं, शारीरिक लक्षण भी दिखाता है। भूख में अचानक कमी या बढ़ोतरी, वजन का घटना या बढ़ना, बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की शिकायत करना आम बात है। ऊर्जा की कमी महसूस करना, हमेशा थका हुआ लगना, या छोटे-छोटे कामों में भी मुश्किल महसूस करना भी संकेत हैं। अगर डॉक्टर की जांच में कोई शारीरिक समस्या नहीं मिली है लेकिन ये लक्षण बने रहते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।
- स्कूल और पढ़ाई में बदलाव देखें. अगर आपका बच्चा पहले अच्छे नंबर लाता था और अब उसके ग्रेड्स गिर रहे हैं, तो यह संकेत हो सकता है। स्कूल जाने से मना करना, क्लास बंक करना, या टीचर्स की शिकायतें आना भी चिंता की बात है। पढ़ाई में ध्यान न लगना, होमवर्क न करना, या प्रोजेक्ट्स को अधूरा छोड़ देना भी डिप्रेशन के संकेत हो सकते हैं। बच्चे से प्यार से बात करके पता लगाएं कि क्या कोई स्कूल में परेशानी है या फिर ये किसी और वजह से हो रहा है।
- बातचीत और रिश्तों में बदलाव. अगर आपका बच्चा पहले खुलकर बात करता था और अब चुप रहता है, तो गौर करें। परिवार के साथ समय बिताने से कतराना, दोस्तों के फोन का जवाब न देना, या सामाजिक गतिविधियों से दूर भागना संकेत हैं। नकारात्मक बातें करना, अपने बारे में बुरा बोलना, या भविष्य के बारे में निराशा जताना भी चिंताजनक है। अगर बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने या मरने की बात करे, तो तुरंत मदद लें।
- कैसे करें बातचीत. बच्चे से बात करते समय प्यार और धैर्य रखें। सीधे पूछें कि क्या वो उदास महसूस कर रहा है या कोई परेशानी है। उसकी बातों को गंभीरता से लें और जजमेंट न करें। 'यह तो छोटी बात है' या 'यह उम्र का चक्कर है' जैसी बातें न कहें। बल्कि कहें कि आप समझ रहे हैं और मदद करना चाहते हैं। शांत माहौल में बैठकर बात करें जब घर में शोर न हो। अगर बच्चा बात नहीं करना चाहता तो जबरदस्ती न करें, लेकिन यह बताएं कि आप हमेशा उसके साथ हैं।