किशोरों के साथ घर के काम कराने की समस्या को कैसे हल करें
जब आपका किशोर घर के काम करने से मना करे तो इन प्रभावी तरीकों से उन्हें जिम्मेदार बनाएं।
- पहले कारणों को समझें. अपने किशोर से बात करके जानें कि वे घर के काम क्यों नहीं करना चाहते। कई बार स्कूल का बोझ, दोस्तों के साथ समय बिताने की इच्छा, या फिर सिर्फ आलस्य हो सकता है। कारण समझने से आपको सही समाधान मिलेगा। उनकी बात सुनें बिना तुरंत सजा देने के बारे में सोचे। कभी-कभी बच्चे अपनी परेशानी साझा करने में झिझकते हैं।
- स्पष्ट नियम और अपेक्षाएं तय करें. अपने किशोर के साथ मिलकर घर के कामों की सूची बनाएं और तय करें कि कौन सा काम कब तक पूरा होना चाहिए। हर काम के लिए समय सीमा निर्धारित करें और इसे कहीं लिखकर रखें जहां सभी देख सकें। नियम सभी के लिए स्पष्ट होने चाहिए। उदाहरण के लिए - 'रविवार तक कमरा साफ करना है' की बजाय 'हर रविवार शाम 5 बजे तक कमरा पूरी तरह साफ होना चाहिए' कहें।
- प्रेरणा और पुरस्कार की व्यवस्था करें. घर के काम करने के लिए सकारात्मक प्रेरणा दें। यह पैसे हो सकते हैं, अतिरिक्त मनोरंजन का समय, या कोई विशेष सुविधा। लेकिन यह भी स्पष्ट करें कि काम न करने के क्या परिणाम होंगे। जैसे मोबाइल का समय कम करना या दोस्तों के साथ बाहर जाने की अनुमति न देना। पुरस्कार और सजा दोनों उचित और संतुलित होने चाहिए।
- एक साथ काम करें और उदाहरण पेश करें. शुरुआत में अपने किशोर के साथ मिलकर काम करें। जब आप खुद घर के काम में सक्रिय रहेंगे तो बच्चे भी प्रेरित होंगे। परिवार के सभी सदस्यों की जिम्मेदारी तय करें ताकि बच्चे को लगे कि यह सिर्फ उनकी समस्या नहीं है। सफाई के दिन पूरा परिवार मिलकर काम करे। इससे काम आसान भी हो जाएगा और मजेदार भी।
- जरूरत पड़ने पर सख्ती भी करें. अगर बात-चीत और प्रेरणा से काम नहीं बन रहा तो दृढ़ता से काम लें। तय किए गए नियमों को सख्ती से लागू करें। लेकिन गुस्से में कोई फैसला न लें। शांत रहकर और स्पष्ट रूप से बताएं कि नियमों का पालन जरूरी है। लगातार याद दिलाने की बजाय प्राकृतिक परिणाम होने दें। जैसे कपड़े धोने नहीं देना अगर गंदे कपड़े लॉन्ड्री में नहीं डाले गए हैं।
- धैर्य रखें और प्रगति को पहचानें. व्यवहार में बदलाव में समय लगता है। छोटी-छोटी प्रगति की भी सराहना करें। अगर आपका किशोर आधे काम भी करता है तो उसकी प्रशंसा करें और बाकी काम के लिए प्रेरित करें। नकारात्मक बातों की बजाय सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें। हर हफ्ते परिवार के साथ मिलकर देखें कि कया अच्छा हुआ और क्या सुधार की जरूरत है।