बच्चों को हारना सिखाने का सही तरीका

बच्चों को सभ्यता से हारना और जीतने-हारने को स्वीकार करना सिखाने की व्यावहारिक गाइड।

  1. अपना व्यवहार पहले सुधारें. सबसे पहले आप अपने व्यवहार को देखें। जब आप किसी खेल या काम में हारते हैं तो कैसे रिएक्ट करते हैं? बच्चे आपको देखकर सीखते हैं। जब आप हारें तो सकारात्मक बातें कहें जैसे 'अच्छा खेल था' या 'अगली बार कोशिश करूंगा'। अपनी निराशा को शांत तरीके से व्यक्त करें। बच्चे को दिखाएं कि हारना भी सीखने का मौका है।
  2. छोटे खेलों से शुरुआत करें. बड़े मुकाबले से पहले घर पर छोटे-छोटे खेल खेलें। कार्ड गेम, बोर्ड गेम, या सामान्य खेल जहां कोई हार-जीत हो। जानबूझकर बच्चे को हमेशा जिताने की बजाय, कभी-कभी उसे हारने दें। इससे वह धीरे-धीरे हारने की भावना को समझने लगेगा। हर खेल के बाद बात करें कि कैसा लगा।
  3. भावनाओं को समझने में मदद करें. जब बच्चा हारकर गुस्सा हो या रो रहा हो, तो उसकी भावनाओं को समझें। कहें 'मैं समझ सकता हूं कि तुम्हें बुरा लग रहा है'। उसे गले लगाएं और बताएं कि यह भावना सामान्य है। फिर धीरे-धीरे समझाएं कि हारना भी एक तरह से सीखना है। बच्चे को अपनी भावनाओं को शब्दों में कहने के लिए प्रेरित करें।
  4. प्रयास की प्रशंसा करें, परिणाम की नहीं. जीतने-हारने से ज्यादा बच्चे की मेहनत और कोशिश की तारीफ करें। कहें 'तुमने बहुत अच्छी कोशिश की' या 'मुझे खुशी है कि तुमने पूरा खेल खेला'। इससे बच्चा समझेगा कि सिर्फ जीतना ही महत्वपूर्ण नहीं है। बच्चे में खेल की भावना विकसित करें जहां मस्ती करना मुख्य लक्ष्य हो।
  5. हारने के फायदे बताएं. बच्चे को समझाएं कि हारना भी एक तरह से सीखना है। बताएं कि हारने से हमें पता चलता है कि कहां सुधार करना है। कहानियां सुनाएं प्रसिद्ध व्यक्तियों की जिन्होंने हारने के बाद और मेहनत की और सफल हुए। इससे बच्चा हारने को नकारात्मक नहीं बल्कि सीखने के अवसर के रूप में देखेगा।
  6. धैर्य रखें और लगातार अभ्यास कराएं. याद रखें कि यह एक दिन में नहीं सीखा जाता। बच्चे को सभ्यता से हारना सीखने में समय लगेगा। हर बार थोड़ा सुधार देखने पर खुशी मनाएं। अगर बच्चा आज कम रोया या कम गुस्सा हुआ तो उसकी सराहना करें। धैर्य रखें और लगातार अभ्यास कराते रहें।