बच्चों के साथ शक्ति संघर्ष कैसे रोकें

अपने बच्चे के साथ रोजमर्रा की लड़ाई-झगड़ा बंद करने के प्रभावी तरीके सीखें।

  1. शक्ति संघर्ष की पहचान करें. शक्ति संघर्ष के संकेत पहचानना जरूरी है। जब आपका बच्चा लगातार 'नहीं' कहता है, आपकी बात नहीं मानता, या छोटी बातों पर भी बहस करता है, तो यह शक्ति संघर्ष का रूप है। अक्सर यह तैयार होने, खाना खाने, सोने जाने, या काम करने के समय होता है। याद रखें कि यह आपके बच्चे का स्वतंत्र बनने का प्राकृतिक हिस्सा है।
  2. स्पष्ट सीमाएं तय करें. घर के मुख्य नियम पहले से तय कर लें और उन्हें सरल भाषा में बताएं। जैसे 'रात 8 बजे सोने का समय है' या 'खाना खाने के बाद ही खेलना है'। ये नियम सभी के लिए एक जैसे होने चाहिए। नियम बनाते समय बच्चे की उम्र और जरूरत का ध्यान रखें। बहुत सारे नियम एक साथ न बनाएं, केवल सबसे जरूरी बातों पर फोकस करें।
  3. विकल्प दें. बच्चों को लगता है कि उनका कोई कंट्रोल नहीं है, इसलिए वे विरोध करते हैं। उन्हें छोटे विकल्प दें जैसे 'तुम पहले नहाना चाहोगे या कपड़े बदलना?', 'आज नाश्ते में रोटी चाहिए या पराठा?' यह उन्हें लगता है कि उनकी राय की कीमत है। विकल्प हमेशा वही दें जो आप वास्तव में मंजूर कर सकते हैं।
  4. शांत रहना सीखें. जब बच्चा जिद कर रहा हो तो आपका गुस्साना स्थिति को और बिगाड़ देता है। गहरी सांस लें, धीमी आवाज में बात करें। अगर बहुत गुस्सा आ रहा है तो कहें 'मुझे थोड़ा वक्त चाहिए, फिर बात करते हैं'। याद रखें कि आप बड़े हैं और आपको संयम दिखाना है। शांत रहकर आप बच्चे को भी शांत होने में मदद करते हैं।
  5. सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान दें. जब बच्चा अच्छा व्यवहार करे तो तुरंत उसकी तारीफ करें। 'वाह, तुमने बिना कहे अपने खिलौने रख दिए' या 'थैंक यू, तुमने पहली बार में सुन लिया'। गलत व्यवहार पर टोकने के बजाय सही व्यवहार को बढ़ावा दें। बच्चे वह करते हैं जिससे उन्हें ध्यान मिलता है, इसलिए अच्छे काम पर ज्यादा फोकस करें।
  6. दिनचर्या बनाएं. नियमित दिनचर्या से बच्चे को पता रहता है कि आगे क्या होने वाला है। सुबह उठने से लेकर रात सोने तक का एक क्रम बनाएं। खाना, नहाना, पढ़ाई, खेल का समय तय कर दें। इससे बच्चे को बार-बार याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती और झगड़े कम होते हैं। दिनचर्या को लिखकर दीवार पर भी लगा सकते हैं।
  7. बातचीत का तरीका सुधारें. बच्चे से बात करते समय उसकी आंखों में देखकर बात करें। साफ और सरल भाषा का प्रयोग करें। 'तुम हमेशा गलत करते हो' जैसी बातें न कहें। इसके बजाय कहें 'मुझे लगता है तुम्हें इस काम में मदद चाहिए'। सवाल पूछें 'क्या तुम्हें लगता है यह सही है?' बच्चे की भावनाओं को समझने की कोशिश करें।