बच्चों के लिए प्रभावी परिणाम कैसे तय करें

जानें कि बच्चों के व्यवहार सुधारने के लिए कारगर परिणाम कैसे निर्धारित करें।

  1. परिणाम और सजा में अंतर समझें. परिणाम एक सीखने का अवसर है, जबकि सजा केवल दंड है। प्रभावी परिणाम बच्चे को यह समझाते हैं कि हर कार्य का कोई न कोई नतीजा होता है। जैसे अगर बच्चा खिलौने बिखेरता है, तो परिणाम यह हो सकता है कि वह उन्हें वापस साफ करे। यह उसे जिम्मेदारी सिखाता है। सजा में गुस्से से चिल्लाना या मारना शामिल है, जो बच्चे के मानसिक विकास के लिए हानिकारक है।
  2. तत्काल और स्पष्ट परिणाम तय करें. परिणाम तुरंत दिए जाने चाहिए, खासकर छोटे बच्चों के लिए। अगर आप कहते हैं 'शाम को देखूंगा', तो बच्चा भूल जाता है कि उसने क्या गलत किया था। परिणाम बिल्कुल साफ होने चाहिए - 'अगर तुम अपना होमवर्क नहीं करोगे, तो टीवी नहीं देख सकोगे।' अस्पष्ट धमकियां जैसे 'अगर तुमने ऐसा किया तो बुरा होगा' काम नहीं करतीं। बच्चे को पहले से ही पता होना चाहिए कि किस व्यवहार का क्या परिणाम होगा।
  3. गलती से संबंधित परिणाम चुनें. परिणाम हमेशा गलती से जुड़े हुए होने चाहिए। अगर बच्चा भाई-बहन के साथ झगड़ा करता है, तो परिणाम यह हो सकता है कि वह कुछ देर अकेले बैठे। अगर वह चीजें तोड़ता है, तो उसे सफाई में मदद करनी चाहिए या अपने पॉकेट मनी से पैसे देने चाहिए। इससे बच्चा सीखता है कि उसके कार्यों का सीधा असर होता है। असंबंधित सजा जैसे खाना छीनना या मारना-पीटना गलत है।
  4. लगातार और निष्पक्ष रहें. एक बार नियम बना दिया तो उसे हमेशा फॉलो करें। अगर आज आपने कहा कि बिना दांत साफ किए टीवी नहीं मिलेगा, तो कल भी यही नियम होना चाहिए। सभी बच्चों के लिए नियम एक समान होने चाहिए। अगर आप कभी सख्त हैं और कभी नरम, तो बच्चे कन्फ्यूज हो जाते हैं। माता-पिता दोनों को मिलकर एक ही रणनीति अपनानी चाहिए, वरना बच्चे इसका फायदा उठाते हैं।
  5. सकारात्मक व्यवहार को पहचानें. केवल गलत व्यवहार पर ही ध्यान न दें, बल्कि अच्छे व्यवहार की तारीफ भी करें। जब बच्चा बिना कहे अपना काम कर ले या किसी की मदद करे, तो उसकी सराहना करें। 'तुमने आज अपने आप तैयार होकर अच्छा किया' जैसी बातें कहें। इससे बच्चा सीखता है कि अच्छे व्यवहार से भी परिणाम मिलते हैं। पॉजिटिव परिणाम नेगेटिव परिणाम से कहीं ज्यादा प्रभावी होते हैं।
  6. उम्र के अनुसार परिणाम तय करें. छोटे बच्चों के लिए आसान और तुरंत समझ आने वाले परिणाम रखें। 2-3 साल के बच्चे को 2-3 मिनट टाइम-आउट दें। बड़े बच्चों के लिए जिम्मेदारियां बढ़ाएं - जैसे अतिरिक्त काम देना या विशेषाधिकार छीनना। किशोरों के साथ बातचीत करके समाधान निकालें और उन्हें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका दें। हर उम्र के बच्चे अलग तरीके से सीखते हैं।