बच्चे की गाली-गलौच की आदत कैसे सुधारें
बच्चे जब गालियां देते हैं तो उन्हें समझदारी और प्रेम से कैसे संभालें।
- शांत रहें और तुरंत प्रतिक्रिया दें. जब बच्चा गाली दे तो सबसे पहले अपना गुस्सा काबू में रखें। चिल्लाना या डांटना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। तुरंत लेकिन शांति से कहें 'ये शब्द घर में नहीं बोले जाते' या 'यह गलत भाषा है'। आपकी तुरंत प्रतिक्रिया बच्चे को समझाती है कि यह व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।
- बच्चे को समझाएं कि गाली क्यों गलत है. उम्र के अनुसार समझाएं कि कुछ शब्द दूसरों को दुःख पहुंचाते हैं। छोटे बच्चों को कहें 'ये शब्द लोगों को बुरा लगता है'। बड़े बच्चों को बताएं कि गालियां सम्मान की कमी दर्शाती हैं और रिश्तों को नुकसान पहुंचाती हैं। उदाहरण देकर समझाएं कि अच्छे शब्द कैसे बेहतर संवाद बनाते हैं।
- वैकल्पिक शब्द सिखाएं. बच्चे को गुस्से या परेशानी व्यक्त करने के सही तरीके सिखाएं। 'मुझे गुस्सा आ रहा है', 'यह मुश्किल है', या 'मैं परेशान हूं' जैसे शब्द सिखाएं। जब बच्चा सही शब्द इस्तेमाल करे तो उसकी तारीफ करें। इससे बच्चा समझेगा कि अपनी भावनाएं व्यक्त करने के बेहतर तरीके हैं।
- घर का माहौल देखें. बच्चे अक्सर बड़ों की नकल करते हैं। घर में बोली जाने वाली भाषा पर ध्यान दें। टीवी, फिल्में, या गाने भी बच्चों पर प्रभाव डालते हैं। अगर घर में कोई गाली देता है तो उसे भी रोकना होगा। बच्चों के सामने हमेशा सभ्य भाषा का इस्तेमाल करें।
- स्पष्ट नियम और परिणाम तय करें. घर में साफ नियम बनाएं कि गाली देना मना है। नियम तोड़ने पर क्या परिणाम होंगे, यह पहले से तय करें। छोटे बच्चों के लिए टाइम-आउट या पसंदीदा खेल रोकना उपयुक्त हो सकता है। बड़े बच्चों के लिए सामाजिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है। परिणाम संयमित और शिक्षाप्रद होने चाहिए।
- सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करें. जब बच्चा गुस्से में भी सभ्य भाषा का इस्तेमाल करे तो उसकी तारीफ करें। 'मुझे खुशी है कि तुमने अपनी परेशानी अच्छे शब्दों में बताई' कहकर उसे प्रोत्साहित करें। सकारात्मक ध्यान देने से बच्चा अच्छा व्यवहार दोहराता है। धैर्य रखें क्योंकि बदलाव में समय लगता है।