बार-बार बीच में बोलने वाले बच्चे को कैसे संभालें

बच्चे के लगातार बीच में बोलने की आदत को ठीक करने के लिए प्रभावी तरीके सीखें।

  1. बच्चे के टोकने के कारणों को समझें. बच्चे अक्सर इसलिए बीच में बोलते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी बात जरूरी है और वे इंतजार नहीं कर सकते। छोटे बच्चों में धैर्य की कमी स्वाभाविक होती है। कभी-कभी यह ध्यान पाने का तरीका भी होता है। अगर बच्चा घर में उपेक्षा महसूस करता है तो वह इस तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश करता है।
  2. स्पष्ट नियम बनाएं. घर में बातचीत के लिए साफ नियम बनाएं। बच्चे को समझाएं कि जब बड़े बात कर रहे हों तो इंतजार करना चाहिए। 'एक्सक्यूज मी' या 'माफ करिए' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना सिखाएं। नियम बनाते समय पूरे परिवार को शामिल करें ताकि सभी इसे मानें। बच्चे को बताएं कि आपातकाल की स्थिति में वे तुरंत बात कर सकते हैं।
  3. सकारात्मक तकनीकें अपनाएं. जब बच्चा धैर्य से इंतजार करे तो उसकी तारीफ जरूर करें। हाथ का इशारा बनाएं जैसे हाथ कंधे पर रखना जब वे कुछ कहना चाहते हैं। इससे आप जान जाएंगे कि बच्चा कुछ कहना चाहता है। बातचीत में बच्चे के लिए भी समय निकालें ताकि वे महसूस करें कि उनकी बात भी महत्वपूर्ण है। दिन में कुछ समय सिर्फ बच्चे के साथ बिताएं।
  4. व्यवहार को नजरअंदाज न करें. जब बच्चा बार-बार बीच में बोले तो शांति से उन्हें रोकें। गुस्से में चिल्लाने से बचें क्योंकि इससे बच्चा और भी जिद्दी हो सकता है। दृढ़ता से लेकिन प्यार से कहें कि अभी उनकी बारी नहीं है। अगर जरूरी बात चल रही है तो बच्चे को दूसरे कमरे में भेजें। बातचीत खत्म होने के बाद बच्चे को बुलाकर उनकी बात सुनें।
  5. बच्चे को धैर्य सिखाएं. धैर्य एक कौशल है जो समय के साथ विकसित होता है। छोटे-छोटे अभ्यास से शुरुआत करें जैसे 30 सेकंड इंतजार करना। धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाएं। इंतजार के समय बच्चे को कोई काम दें जैसे गिनती करना या गहरी सांस लेना। खेल के माध्यम से धैर्य सिखाएं जैसे 'स्टेच्यू' गेम खेलना।
  6. अपना उदाहरण दें. बच्चे माता-पिता को देखकर सीखते हैं। जब आप फोन पर बात कर रहे हों या किसी से मिल रहे हों तो बच्चे को भी बीच में न टोकें। दूसरों से बात करते समय शिष्टाचार का प्रयोग करें। पारिवारिक बातचीत में सभी को बोलने का मौका दें। जब बच्चा बात कर रहा हो तो आप भी बीच में न टोकें।