बच्चे को मारना-पीटना कैसे रोकें - प्रभावी तरीके

छोटे बच्चे के मारने-पीटने की आदत को रोकने के लिए प्रभावी और सकारात्मक तरीके सीखें।

  1. मारने की वजह समझें. बच्चे मारते हैं क्योंकि वे अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते। गुस्सा, निराशा, उत्साह या ध्यान पाने की चाह - ये सभी कारण हो सकते हैं। कभी-कभी बच्चे सिर्फ देखना चाहते हैं कि क्या होगा। पहले यह समझें कि आपका बच्चा किस स्थिति में मारता है - क्या वह थका हुआ होता है, भूखा होता है, या कोई खिलौना छीना गया होता है।
  2. तुरंत और शांत प्रतिक्रिया दें. जैसे ही बच्चा मारे, तुरंत उसका हाथ पकड़ें और शांत लेकिन दृढ़ आवाज में कहें 'मारना ठीक नहीं है'। चिल्लाएं नहीं और न ही उल्टा मारें। बच्चे को स्थिति से हटा दें और कुछ मिनटों के लिए उससे दूरी बनाएं। इससे बच्चे को समझ आएगा कि मारने से खेल बंद हो जाता है और मज़ा खत्म हो जाता है।
  3. वैकल्पिक तरीके सिखाएं. बच्चे को दिखाएं कि गुस्से को कैसे व्यक्त करना है। उसे सिखाएं कि वह अपने हाथों को जोर से दबाए, तकिए को दबाए, या 'मुझे गुस्सा आ रहा है' कहे। जब बच्चा परेशान हो तो उसकी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करने में मदद करें - 'तुम्हें गुस्सा आ रहा है क्योंकि खिलौना टूट गया।' धीरे-धीरे बच्चा अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने लगेगा।
  4. सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहित करें. जब भी बच्चा बिना मारे अपनी बात कहे या शेयर करे, तो उसकी तारीफ करें। 'वाह, तुमने बहुत अच्छे से बताया कि तुम्हें क्या चाहिए' कहकर उसे प्रोत्साहित करें। बच्चे को ढेर सारा प्यार और ध्यान दें जब वह अच्छा व्यवहार कर रहा हो। नकारात्मक व्यवहार पर कम ध्यान दें और सकारात्मक व्यवहार पर ज्यादा ध्यान दें।
  5. निरंतरता बनाए रखें. हर बार एक ही तरीके से प्रतिक्रिया दें। अगर आज मारने पर आप उसे रोकते हैं तो कल भी रोकें। घर के सभी सदस्यों को समान नियम अपनाने चाहिए। अगर आप कभी हंसकर या नजरअंदाज करके प्रतिक्रिया देंगे तो बच्चा समझ नहीं पाएगा। धैर्य रखें क्योंकि व्यवहार बदलने में समय लगता है।
  6. माहौल को सुधारें. बच्चे की दिनचर्या को नियमित बनाएं ताकि वह कम परेशान हो। पर्याप्त नींद, समय पर खाना और खेल का समय दें। अगर कोई खास स्थिति में बच्चा ज्यादा मारता है तो उस स्थिति से बचें या उसके लिए पहले से तैयारी करें। घर का माहौल शांत रखें और खुद भी गुस्से में चिल्लाने या मारने से बचें क्योंकि बच्चे देखकर सीखते हैं।