अपने बच्चे से चिंता के बारे में कैसे बात करें
बच्चों के साथ चिंता और डर के बारे में संवेदनशील और सहायक तरीके से बातचीत करने का गाइड।
- सही समय और माहौल चुनें. जब आपका बच्चा शांत हो और आपके पास पूरा ध्यान देने का समय हो, तभी यह बातचीत शुरू करें। टीवी बंद करें, फोन एक तरफ रखें और किसी शांत जगह बैठें। अगर बच्चा परेशान है तो पहले उन्हें शांत होने दें। कभी-कभी साथ में कोई एक्टिविटी करते समय (जैसे ड्राइंग या वॉक करते समय) बच्चे ज्यादा खुलकर बात करते हैं।
- बच्चे की बात सुनें और समझें. पहले यह जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा क्या महसूस कर रहा है। उनसे पूछें कि वे कैसा फील कर रहे हैं और क्या उन्हें कोई खास बात परेशान कर रही है। उनकी बातों को गंभीरता से लें और 'कुछ नहीं है' या 'डरने की कोई बात नहीं' जैसे जवाब न दें। इसके बजाय कहें 'मैं समझ सकता हूं कि तुम परेशान हो।' उनके शब्दों और बॉडी लैंग्वेज दोनों को देखें।
- चिंता को सामान्य बताएं. बच्चे को बताएं कि चिंता महसूस करना बिल्कुल सामान्य है और हर व्यक्ति कभी न कभी ऐसा महसूस करता है। उन्हें बताएं कि आप भी कभी चिंता करते हैं और यह गलत बात नहीं है। कहें, 'जब मैं तुम्हारी उम्र का था, तो मुझे भी कभी-कभी डर लगता था।' इससे बच्चे को लगेगा कि वह अकेला नहीं है और उसकी फीलिंग्स सामान्य हैं।
- आसान भाषा में समझाएं. बच्चे की उम्र के हिसाब से सरल शब्दों का इस्तेमाल करें। छोटे बच्चों के लिए कहें, 'कभी-कभी हमारे दिमाग में चिंता की छोटी आवाज आती है।' बड़े बच्चों के लिए समझाएं कि चिंता कैसे हमारे शरीर को प्रभावित करती है - दिल तेज धड़कना, पेट में गुड़गुड़ाहट होना। उन्हें बताएं कि यह हमारे दिमाग का हमें सुरक्षित रखने का तरीका है, लेकिन कभी-कभी यह जरूरत से ज्यादा काम करता है।
- आराम करने के तरीके सिखाएं. बच्चे को सिखाएं कि जब चिंता हो तो कैसे शांत हो सकते हैं। गहरी सांस लेने का तरीका दिखाएं - नाक से सांस अंदर लें, थोड़ा रोकें और मुंह से धीरे-धीरे छोड़ें। उन्हें 10 तक गिनती करना या अपनी पसंदीदा जगह के बारे में सोचना सिखाएं। छोटे बच्चों के साथ कोई स्टफ्ड टॉय या कंबल का इस्तेमाल करें जो उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाए।
- समाधान मिलकर खोजें. बच्चे के साथ मिलकर उनकी समस्या का हल निकालने की कोशिश करें। पूछें कि वे क्या करना चाहेंगे और आप कैसे उनकी मदद कर सकते हैं। छोटे कदम बनाएं और हर छोटी सफलता को celebrate करें। अगर बच्चा स्कूल जाने से डरता है, तो पहले स्कूल के गेट तक जाना, फिर अंदर जाकर टीचर से मिलना जैसे छोटे कदम उठाएं।
- नियमित बातचीत बनाए रखें. यह एक बार की बातचीत नहीं है। रोजाना बच्चे से पूछते रहें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं। उन्हें बताएं कि वे किसी भी समय आपसे बात कर सकते हैं। अगर कोई खास स्थिति आने वाली है जो चिंता का कारण हो सकती है (जैसे नया स्कूल या डॉक्टर के पास जाना), तो पहले से ही उस बारे में बात करें और तैयारी करें।