किशोर के दोस्ती के झगड़े में कैसे मदद करें
अपने टीनएजर को दोस्तों के बीच होने वाले झगड़े और नाटक से निपटने में मदद करने के व्यावहारिक तरीके।
- पहले सुनें, फिर सलाह दें. जब आपका बच्चा दोस्ती की परेशानी लेकर आए, तो सबसे पहले धैर्य से उसकी बात सुनें। तुरंत समाधान देने की कोशिश न करें। उसे पूरी बात कहने दें और समझने की कोशिश करें कि वो कैसा महसूस कर रहा है। 'मैं समझ सकता हूं कि तुम्हें कितना बुरा लग रहा होगा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें। जब वो महसूस करे कि आप उसकी बात समझ रहे हैं, तभी आगे की बात करें।
- समस्या को समझने में मदद करें. अपने बच्चे से पूछें कि असल में क्या हुआ था और दूसरे व्यक्ति की तरफ से भी स्थिति को देखने के लिए प्रेरित करें। 'तुम्हें क्या लगता है, तुम्हारे दोस्त ने ऐसा क्यों किया होगा?' जैसे सवाल पूछें। इससे उन्हें दूसरों के नजरिए को समझने में मदद मिलती है। छोटी-मोटी गलतफहमियों और गंभीर समस्याओं के बीच अंतर करना सिखाएं।
- समाधान के विकल्प सुझाएं. अपने बच्चे के साथ मिलकर समस्या के संभावित समाधान पर चर्चा करें। सीधे बात करना, कुछ समय का अंतर लेना, या किसी तीसरे व्यक्ति की मदद लेना जैसे विकल्प बताएं। उन्हें यह सिखाएं कि हर समस्या का तुरंत समाधान नहीं होता और कभी-कभी समय ही सबसे अच्छा इलाज होता है। अपने बच्चे को अपने अनुभव भी बताएं कि आपने कैसे ऐसी स्थितियों को संभाला था।
- सोशल मीडिया और डिजिटल ड्रामा से निपटना. आज के समय में दोस्ती के झगड़े अक्सर सोशल मीडिया पर फैलते हैं। अपने बच्चे को समझाएं कि ऑनलाइन किसी के बारे में नकारात्मक बातें न लिखें। स्क्रीनशॉट लेकर बातें फैलाना या ग्रुप चैट में किसी की बुराई करना गलत है। उन्हें सिखाएं कि गुस्से में कोई मैसेज न भेजें और पहले सोचें फिर टाइप करें। जरूरत पड़ने पर कुछ समय के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाने को कहें।
- आत्मविश्वास बढ़ाना और सीमा तय करना. अपने बच्चे को सिखाएं कि अच्छे दोस्त कैसे होते हैं और रिश्ते में सम्मान क्यों जरूरी है। उन्हें बताएं कि अगर कोई दोस्त लगातार उन्हें परेशान करता है या बुरा महसूस कराता है, तो उससे दूरी बनाना ठीक है। नए दोस्त बनाने के लिए प्रेरित करें और विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने को कहें। उनके अच्छे फैसलों की तारीफ करें ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े।
- कब दखल देना जरूरी है. अगर झगड़ा गंभीर रूप ले ले, साइबर बुलिंग हो रही हो, या आपके बच्चे को शारीरिक या मानसिक नुकसान हो रहा हो तो तुरंत दखल दें। स्कूल के काउंसलर या टीचर से बात करें। अगर आपका बच्चा बहुत परेशान है, खाना-पीना छोड़ दिया है, या अकेले रहने लगा है तो पेशेवर मदद लें। कभी-कभी दूसरे बच्चे के माता-पिता से भी बात करनी पड़ सकती है, लेकिन यह बहुत सोच-समझकर करें।