अत्यधिक संवेदनशील बच्चे की मदद कैसे करें
संवेदनशील बच्चों को समझने और उनकी भावनाओं को संभालने में मदद करने के व्यावहारिक तरीके।
- संवेदनशीलता को समझें. अत्यधिक संवेदनशील बच्चे आवाज़, रोशनी, बनावट और भावनाओं को गहराई से महसूस करते हैं। वे भीड़-भाड़ से परेशान हो सकते हैं, कपड़ों के लेबल से चिढ़ सकते हैं, या दूसरों की भावनाओं को तुरंत भांप लेते हैं। यह उनका दिमाग़ अधिक जानकारी को प्रोसेस करता है, इसलिए वे जल्दी थक जाते हैं। इसे कमजोरी न समझें - यह उनकी विशेषता है जो सही दिशा में विकसित होने पर उनकी ताकत बन सकती है।
- घर का माहौल शांत बनाएं. घर में शोरगुल कम रखें और अचानक तेज़ आवाज़ों से बचें। टीवी और म्यूज़िक का वॉल्यूम कम रखें। रंग-बिरंगी तेज़ लाइट्स के बजाय मंद और गर्म रोशनी का इस्तेमाल करें। घर में एक शांत कोना बनाएं जहां बच्चा परेशान होने पर जा सके। इस जगह पर उसकी पसंदीदा चीज़ें रखें जैसे नरम तकिया, किताबें या खिलौने। दिनचर्या नियमित रखें क्योंकि अचानक बदलाव संवेदनशील बच्चों को परेशान करते हैं।
- भावनाओं को पहचानना सिखाएं. बच्चे को अपनी भावनाओं के नाम बताना सिखाएं - गुस्सा, उदासी, डर, खुशी। जब वे परेशान हों तो पूछें 'तुम्हें कैसा लग रहा है?' उनकी भावनाओं को नकारें नहीं, बल्कि कहें 'मैं समझ रहा हूं कि तुम परेशान हो।' भावनाओं के बारे में किताबें पढ़ें और चेहरे के भावों की पहचान करने वाले खेल खेलें। उन्हें बताएं कि गुस्सा आना सामान्य है, लेकिन दूसरों को मारना या चीज़ें फेंकना सही नहीं।
- शांत होने की तकनीकें सिखाएं. गहरी सांस लेने की तकनीक सिखाएं - 'फूल सूंघने की तरह सांस अंदर लें, मोमबत्ती बुझाने की तरह बाहर छोड़ें।' उनके साथ मिलकर 10 तक गिनती करें या पसंदीदा गाना गुनगुनाएं। मालिश या हल्का दबाव देना कई संवेदनशील बच्चों को आराम देता है। पानी से खेलना, प्ले-डो या स्ट्रेस बॉल दबाना भी मददगार हो सकता है। रोज़ाना कुछ मिनट शांत गतिविधियों के लिए निकालें जैसे रंग भरना या पज़ल लगाना।
- सामाजिक स्थितियों की तैयारी करें. नई जगह जाने या मेहमानों के आने से पहले बच्चे को तैयार करें। बताएं कि वहां कौन होगा, कितनी देर रुकना है, और क्या उम्मीद करें। शुरुआत में छोटी और कम भीड़ वाली जगहों पर ले जाएं। अगर बच्चा परेशान हो जाए तो उसे वहां से निकालने का प्लान तैयार रखें। उन्हें अपने साथ कोई पसंदीदा खिलौना या आराम देने वाली चीज़ ले जाने दें। धीरे-धीरे नए अनुभवों की मात्रा बढ़ाएं।
- स्कूल के साथ संपर्क बनाए रखें. टीचर को बताएं कि आपका बच्चा संवेदनशील है और कौन सी चीज़ें उसे परेशान करती हैं। स्कूल में भी शांत जगह की व्यवस्था करने को कहें जहां बच्चा ज़रूरत पड़ने पर जा सके। होमवर्क और प्रोजेक्ट्स के लिए अतिरिक्त समय मांगें क्योंकि संवेदनशील बच्चे अक्सर परफेक्शनिस्ट होते हैं। स्कूल की तेज़ आवाज़ों (जैसे फायर ड्रिल) के लिए पहले से तैयार करें। टीचर से नियमित फीडबैक लेते रहें।