किशोर के दोस्तों के ग्रुप में होने वाले झगड़ों से निपटने में कैसे करें मदद

अपने टीनएजर को दोस्तों के बीच होने वाली समस्याओं से निपटने में मदद करने के व्यावहारिक तरीके जानें।

  1. पहले सुनें, फिर सलाह दें. जब आपका बच्चा दोस्तों की समस्या लेकर आए तो सबसे पहले उसकी बात पूरी तरह सुनें। बीच में टोकें नहीं और न ही तुरंत अपनी राय दें। उसे लगना चाहिए कि आप उसकी परेशानी को समझ रहे हैं। 'तुम्हें कैसा लग रहा है?' या 'यह तुम्हारे लिए मुश्किल होगा' जैसे शब्द कहें। जब वो अपनी बात पूरी कह दे, तब सवाल पूछें और समाधान के बारे में बात करें।
  2. समस्या को समझने में करें मदद. अकसर बच्चे अपनी भावनाओं में इतने उलझ जाते हैं कि समस्या की जड़ समझ नहीं पाते। उनसे पूछें कि झगड़ा कैसे शुरू हुआ, कौन क्या कह रहा है, और वो इससे कैसे परेशान हैं। उन्हें अलग-अलग नजरिए से सोचने के लिए प्रेरित करें। 'क्या लगता है तुम्हारे दोस्त भी परेशान हैं?' या 'हो सकता है उसका मतलब कुछ और हो' जैसे सवाल पूछें।
  3. सही और गलत में फर्क समझाएं. इस मौके का फायदा उठाकर अपने बच्चे को अच्छे दोस्त और बुरे दोस्त के बीच फर्क समझाएं। अगर कोई दोस्त लगातार उन्हें नीचा दिखाता है, झूठ बोलता है, या गलत काम करने के लिए कहता है, तो यह सही नहीं है। उन्हें बताएं कि अच्छे दोस्त एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और मुश्किल वक्त में साथ खड़े रहते हैं।
  4. समाधान के विकल्प सुझाएं. बच्चे को खुद सोचने का मौका दें कि वो इस स्थिति को कैसे संभाल सकते हैं। उन्हें कुछ विकल्प दें जैसे सीधी बात करना, थोड़ा वक्त लेना, या किसी विश्वसनीय दोस्त या शिक्षक से मदद मांगना। उन्हें बताएं कि कभी-कभी माफी मांगना भी सही होता है, अगर उनकी भी कोई गलती हो। लेकिन हमेशा झुकने की जरूरत नहीं है।
  5. सामाजिक कौशल सिखाएं. इस मौके का इस्तेमाल करके अपने बच्चे को बेहतर संवाद करना सिखाएं। उन्हें बताएं कि गुस्से में कुछ भी कहना सही नहीं है। 'मैं समझ सकता हूं' या 'मुझे लगता है कि हमारे बीच गलतफहमी हो गई है' जैसे शब्द इस्तेमाल करना सिखाएं। उन्हें सिखाएं कि हर किसी की अलग राय हो सकती है और यह सामान्य बात है।
  6. कब दखल देना जरूरी है. अगर झगड़ा साइबर बुलिंग, धमकी, या शारीरिक हिंसा तक पहुंच गया हो तो आपको दखल देना होगा। स्कूल से बात करें और जरूरत हो तो अन्य बच्चों के माता-पिता से भी संपर्क करें। अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा तनाव में है, खाना-पीना छोड़ रहा है, या स्कूल जाने से डर रहा है तो तुरंत कदम उठाएं।