जब आपका किशोर खेल छोड़ना चाहता है - माता-पिता के लिए गाइड
जानिए कि जब आपका टीनएजर बच्चा कोई खेल छोड़ना चाहता है तो कैसे संभालें और सही निर्णय लें।
- पहले कारण समझें. बिना किसी प्रतिक्रिया दिए, शांति से बैठकर अपने बच्चे से बात करें। पूछें कि वह खेल छोड़ना क्यों चाहता है। कई बार कारण यह हो सकते हैं: कोच से समस्या, दोस्तों के साथ तनाव, अकादमिक दबाव, रुचि में कमी, या चोट का डर। उनकी बात को ध्यान से सुनें और समझने की कोशिश करें। यह महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें जज न करें बल्कि उनके नजरिए को समझें।
- फैसला लेने से पहले समय दें. तुरंत हां या ना कहने की बजाय, थोड़ा समय लें। बच्चे को भी सोचने का मौका दें कि वह वाकई में यह निर्णय लेना चाहता है। 1-2 सप्ताह का ब्रेक दें जहां वे खेल से दूर रह सकें। इस दौरान उनसे नियमित बात करते रहें। कभी-कभी छोटा ब्रेक ही काफी होता है और बच्चे अपने आप वापस खेल में रुचि दिखाने लगते हैं।
- समस्या का समाधान ढूंढें. अगर समस्या कोच या टीम के सदस्यों के साथ है, तो कोच से बात करने का विकल्प देखें। अगर समय प्रबंधन की समस्या है, तो साथ मिलकर एक बेहतर शेड्यूल बनाएं। अगर दबाव की वजह है, तो प्रतिस्पर्धा को कम करके खेल का मजा बढ़ाने पर फोकस करें। कई बार छोटे बदलाव से बड़ी समस्या हल हो जाती है।
- विकल्प तलाशें. अगर वे वाकई में उस खेल से बोर हो गए हैं, तो दूसरे खेल या गतिविधियों के विकल्प देखें। हो सकता है वे कोई नया खेल आजमाना चाहते हों या किसी दूसरी गतिविधि में रुचि रखते हों जैसे संगीत, नृत्य, या कला। मुख्य बात यह है कि वे किसी न किसी शारीरिक या रचनात्मक गतिविधि में लगे रहें।
- प्रतिबद्धता के बारे में सिखाएं. इस मौके का इस्तेमाल करके अपने बच्चे को प्रतिबद्धता के बारे में सिखाएं। समझाएं कि टीम और कोच उन पर भरोसा करते हैं। अगर सीजन चल रहा है, तो उसे पूरा करने को कहें। हालांकि, यह भी स्पष्ट करें कि अगर वे वाकई में खुश नहीं हैं तो जबरदस्ती नहीं की जाएगी। संतुलन बनाना जरूरी है।
- निर्णय को सम्मान दें. अंत में, अगर सभी विकल्प आजमाने के बाद भी आपका बच्चा खेल छोड़ना चाहता है, तो उनके निर्णय का सम्मान करें। यह उनकी जिंदगी है और उन्हें अपने विकल्प चुनने का अधिकार है। उन्हें बताएं कि आप हमेशा उनका साथ देंगे चाहे वे कोई भी निर्णय लें। नकारात्मक टिप्पणी या तुलना से बचें।