बच्चा पाठ्येतर गतिविधियों से मना करे तो क्या करें
जब आपका बच्चा एक्स्ट्राकरिक्यूलर एक्टिविटी से मना करे तो उसे कैसे समझाएं और प्रेरित करें।
- पहले मना करने का कारण समझें. बच्चे से प्यार से बात करके पता लगाएं कि वो क्यों नहीं करना चाहता। हो सकता है उसे डर लग रहा हो, शर्म आ रही हो, या फिर वो किसी और चीज में दिलचस्प हो। कुछ बच्चे अगर पहले से ही स्कूल में व्यस्त हैं तो अतिरिक्त दबाव महसूस कर सकते हैं। उसकी बात सुनें और उसे यह एहसास दिलाएं कि उसकी भावनाओं का सम्मान किया जाता है। जल्दबाजी में फैसला न लें।
- दबाव डाले बिना विकल्प दें. एक ही एक्टिविटी पर जोर न दें। बच्चे को कई विकल्प दें और उसे अपनी पसंद चुनने दें। अगर उसे डांस पसंद नहीं तो शायद पेंटिंग या क्रिकेट में दिलचस्पी हो। घर पर ही अलग-अलग गतिविधियां करके दिखाएं। उसके दोस्तों से पूछें कि वे क्या करते हैं। कभी-कभी दोस्तों का साथ मिले तो बच्चे खुद ही इच्छा जताते हैं।
- छोटी शुरुआत करें. एकदम से पूरा कोर्स या क्लास में डालने के बजाय ट्रायल क्लास या छोटे सेशन से शुरुआत करें। घर पर पहले वो एक्टिविटी का अभ्यास कराएं ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े। उदाहरण के लिए, अगर म्यूजिक सिखाना चाहते हैं तो पहले घर पर गाना-बजाना शुरू करें। सफलता की छोटी खुशी मनाएं और बच्चे की हर कोशिश की तारीफ करें।
- मजबूरी न करें, प्रेरणा दें. बच्चे को जबरदस्ती किसी एक्टिविटी के लिए मजबूर न करें। इससे वो और भी ज्यादा विरोध कर सकता है। इसके बजाय उसे दिखाएं कि ये गतिविधियां कितनी मजेदार हो सकती हैं। उसके सामने दूसरे बच्चों के सकारात्मक अनुभव साझा करें। अगर आप खुद भी कोई हॉबी करते हैं तो उसे अपने साथ शामिल करें। धैर्य रखें और बच्चे को अपना समय दें।
- सामाजिक डर को कम करें. कुछ बच्चे नई जगह जाने या नए लोगों से मिलने से घबराते हैं। ऐसे में पहले उस जगह का दौरा करें जहां क्लास होती है। टीचर से मिलवाएं और बच्चे को माहौल से परिचित कराएं। शुरुआत में बच्चे के साथ रहें अगर जरूरी हो। दूसरे बच्चों से दोस्ती बनाने में मदद करें। धीरे-धीरे बच्चे का डर कम हो जाएगा।
- रुचि विकसित करने का समय दें. कुछ बच्चों को किसी चीज में रुचि विकसित करने के लिए समय चाहिए होता है। एकदम से हार न मानें अगर बच्चा तुरंत उत्साह नहीं दिखाता। कई महीनों तक धैर्य रखें और अलग-अलग तरीकों से वो एक्टिविटी को दिलचस्प बनाने की कोशिश करें। कभी-कभी बच्चे का मन बदल जाता है जब वे बड़े होते हैं या दूसरे बच्चों को देखते हैं।