चिट्ठी लिखना और डाक से भेजना कैसे सिखाएं

बच्चों को चिट्ठी लिखने से लेकर डाकघर में भेजने तक की पूरी प्रक्रिया सिखाने का सरल तरीका।

  1. चिट्ठी लिखने की तैयारी. सबसे पहले जरूरी सामान इकट्ठा करें - साफ कागज, पेन या पेंसिल, और लिफाफा। बच्चे को समझाएं कि वे किसको चिट्ठी लिख रहे हैं और क्या बात करना चाहते हैं। एक शांत जगह बैठकर मन में सोचें कि चिट्ठी में क्या लिखना है। छोटे बच्चों के लिए पहले मौखिक रूप से बातचीत करवाएं कि वे क्या कहना चाहते हैं।
  2. चिट्ठी का प्रारूप और लेखन. चिट्ठी की शुरुआत तारीख और 'प्रिय' या 'प्यारे' से करें। फिर मुख्य संदेश लिखें - यह कुछ भी हो सकता है जैसे कुशलक्षेम पूछना, कोई खबर देना, या बस प्यार जताना। वाक्य छोटे और सरल रखें। अंत में 'आपका प्यारा' या 'स्नेह सहित' लिखकर अपना नाम लगाएं। छोटे बच्चों की मदद करें और उन्हें अपने शब्दों में लिखने दें, भले ही वर्तनी में गलतियां हों।
  3. लिफाफे पर पता लिखना. लिफाफे के बीच में जिसको चिट्ठी भेजनी है उसका पूरा पता साफ-साफ लिखें - नाम, घर का पता, शहर, राज्य और पिन कोड। ऊपरी बाएं कोने में अपना पता लिखें ताकि चिट्ठी वापस आ सके अगर कोई समस्या हो। पता लिखते समय बड़े अक्षरों का इस्तेमाल करें और साफ लिखावट रखें। बच्चे को समझाएं कि सही पता होना बहुत जरूरी है।
  4. डाक टिकट लगाना. लिफाफे के दाहिने ऊपरी कोने में डाक टिकट लगाएं। घरेलू चिट्ठी के लिए सामान्य डाक टिकट काफी होता है। टिकट को सीधा और मजबूती से चिपकाएं। अगर आपके पास टिकट नहीं है तो डाकघर या स्टेशनरी की दुकान से खरीद सकते हैं। बच्चे को बताएं कि टिकट के बिना चिट्ठी नहीं भेजी जा सकती।
  5. डाकघर में चिट्ठी भेजना. तैयार चिट्ठी को लेकर नजदीकी डाकघर जाएं या डाक पेटी (पोस्ट बॉक्स) में डालें। डाकघर में काउंटर पर चिट्ठी दे सकते हैं और पूछ सकते हैं कि सब कुछ सही है या नहीं। लाल रंग की डाक पेटी में भी चिट्ठी डाल सकते हैं - बच्चे को स्लॉट में चिट्ठी डालने दें। उन्हें बताएं कि चिट्ठी को पहुंचने में कुछ दिन लगते हैं और धैर्य रखना जरूरी है।