बच्चों को फोन की शिष्टाचार सिखाने का तरीका
अपने बच्चे को फोन पर विनम्र और सभ्य तरीके से बात करना सिखाएं।
- फोन उठाने का सही तरीका. बच्चे को सिखाएं कि फोन की तीसरी घंटी के बाद उठाएं। फोन उठाते समय 'नमस्ते' या 'हैलो' कहकर अपना नाम बताएं। जैसे 'नमस्ते, मैं राहुल बोल रहा हूं'। आवाज साफ और धीमी रखें। कभी भी चिल्लाकर या बहुत धीमी आवाज में बात न करें।
- सुनना और जवाब देना. बच्चे को सिखाएं कि फोन पर धैर्य से सुनें। बीच में न बोलें। अगर कोई गलत नंबर डायल करे तो विनम्रता से 'माफ करिए, आपका नंबर गलत लग गया है' कहें। अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति बात कर रहा हो तो 'जी हां' और 'जी नहीं' का इस्तेमाल करें। हमेशा 'कृपया' और 'धन्यवाद' जैसे शब्द इस्तेमाल करें।
- दूसरे के लिए संदेश लेना. अगर फोन किसी और के लिए आया है तो कहें 'कृपया एक मिनट रुकिए'। फोन को मेज पर धीमे से रखें, न कि फेंकें। व्यक्ति को बुलाने जाते समय फोन पर वापस आकर बताएं कि वे आ रहे हैं। अगर वह व्यक्ति घर पर नहीं है तो कहें 'वे इस समय घर पर नहीं हैं, क्या आप कोई संदेश देना चाहेंगे?' संदेश लेते समय नाम, फोन नंबर और मुख्य बात लिखकर रखें।
- फोन काटने का शिष्टाचार. बात खत्म करने से पहले 'धन्यवाद' और 'नमस्ते' जरूर कहें। फोन धीमे से काटें। कभी भी अचानक या जोर से फोन न काटें। अगर गलती से फोन कट जाए तो वापस कॉल करके माफी मांगें। बुजुर्गों से बात करते समय पहले वे फोन काटें, फिर आप काटें।
- बचने योग्य गलतियां. फोन पर बात करते समय खाना न खाएं या च्युइंग गम न चबाएं। टीवी या संगीत की आवाज कम करें। फोन पर 'कौन है?' की जगह 'मैं कैसे आपकी मदद कर सकता हूं?' कहें। अजनबियों को घर की निजी जानकारी न दें। अगर माता-पिता घर पर नहीं हैं तो यह न बताएं, बल्कि कहें कि 'वे इस समय बात नहीं कर सकते'।