बच्चों को बड़ों से बात करना कैसे सिखाएं
अपने बच्चों को बड़ों से आत्मविश्वास के साथ बातचीत करना सिखाने के लिए व्यावहारिक तरीके।
- बुनियादी शिष्टाचार सिखाएं. सबसे पहले बच्चों को नमस्कार करना, धन्यवाद कहना और अनुमति लेना सिखाएं। घर में ही अभ्यास करें - जब कोई मेहमान आए तो बच्चे से कहें कि वे 'नमस्ते आंटी जी' या 'नमस्कार अंकल जी' कहें। बच्चे को समझाएं कि बड़ों से बात करते समय आंख मिलाना और मुस्कराना अच्छी बात है। छोटी-छोटी बातों से शुरुआत करें जैसे 'आप कैसे हैं?' या 'क्या आप चाय लेंगे?'। इन्हें रोजमर्रा की आदत बनाने से बच्चे में विनम्रता आएगी।
- सुरक्षित वातावरण में अभ्यास कराएं. पहले परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों के साथ बातचीत का अभ्यास कराएं। दादा-दादी, नाना-नानी से बात करने के लिए प्रोत्साहित करें। फिर धीरे-धीरे पड़ोसियों और परिवारिक मित्रों से मिलवाएं। बच्चे के साथ रहें और जरूरत पड़ने पर मदद करें। अगर बच्चा शर्माता है तो उसे जबरदस्ती न करें - बस उनके पास खड़े रहें और धैर्य रखें। सफल बातचीत के बाद बच्चे की प्रशंसा करना न भूलें।
- दिलचस्प विषय सुझाएं. बच्चों को सिखाएं कि बड़ों से क्या बात करनी चाहिए। उनके शौक, स्कूल की बातें, मौसम, त्योहार या पारिवारिक अवसर अच्छे विषय हैं। उदाहरण के लिए 'आंटी जी, आज स्कूल में हमने चित्रकारी की है' या 'अंकल जी, क्या आप भी क्रिकेट देखते हैं?' जैसी बातें। बच्चे को सिखाएं कि सवाल पूछना और जवाब सुनना दोनों जरूरी है। व्यक्तिगत या असहज करने वाले सवाल न पूछने की समझाइश दें।
- डर और झिझक दूर करने के तरीके. कई बच्चे बड़ों से डरते या झिझकते हैं। इसके लिए घर में रोल प्ले करें - आप बड़े बनें और बच्चे को बातचीत का अभ्यास कराएं। बच्चे को बताएं कि गलती करना सामान्य बात है और बड़े लोग समझदार होते हैं। अगर बच्चा कुछ गलत कहे तो बाद में प्यार से समझाएं, उस वक्त शर्मिंदा न करें। छोटी सफलताओं को मनाएं और बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाएं।