अपनी गलती मानना और माफी मांगना कैसे सिखाएं
बच्चों को सच्चे दिल से माफी मांगना और अपनी गलतियों से सीखना सिखाने के लिए व्यावहारिक तरीके।
- सच्ची माफी के मुख्य हिस्से समझाएं. अपने बच्चे को बताएं कि असली माफी में चार बातें होती हैं: पहले अपनी गलती मानना ('मैंने गलत किया'), फिर समझना कि दूसरे को कैसा लगा ('तुम्हें बुरा लगा होगा'), तीसरे माफी मांगना ('मुझे माफ कर दो'), और आखिर में बेहतर करने का वादा ('मैं ऐसा दोबारा नहीं करूंगा')। इन चारों बातों को साथ में कहने से माफी सच्ची और मतलब की लगती है।
- अपने उदाहरण से सिखाएं. जब आपसे कोई गलती हो जाए, तो अपने बच्चे के सामने सच्चे दिल से माफी मांगें। अगर आपने जल्दबाजी में डांटा हो या कोई वादा तोड़ा हो, तो खुद भी वही चार कदम फॉलो करें। कहें 'मैंने गुस्से में तुम्हें जरूरत से ज्यादा डांटा, तुम्हें बुरा लगा होगा, मुझे माफ करो, मैं अगली बार पहले शांत होकर बात करूंगी।' यह देखकर बच्चे सीखते हैं कि बड़े भी गलतियां करते हैं और माफी मांगना कमजोरी नहीं बल्कि बहादुरी है।
- सही समय और माहौल चुनें. माफी मांगने के लिए शांत और प्राइवेट माहौल चुनें जहां दोनों तरफ के लोग बात सुन सकें। अगर बच्चा या दूसरा व्यक्ति अभी भी बहुत गुस्से में है, तो थोड़ा इंतजार करें। कहें 'मैं देख रहा हूं तुम अभी भी परेशान हो, जब तुम तैयार हो तो मैं तुमसे एक जरूरी बात करना चाहता हूं।' जल्दबाजी में मांगी गई माफी अक्सर असली नहीं लगती।
- सिर्फ शब्दों से नहीं, काम से भी दिखाएं. माफी के बाद यह भी सिखाएं कि गलती सुधारने के लिए कुछ करना भी जरूरी है। अगर किसी का खिलौना तोड़ा है तो उसे ठीक कराने या नया दिलाने की कोशिश करें। अगर किसी को बुरा लगाया है तो उसके लिए कुछ अच्छा करें। यह 'रेस्टिट्यूशन' कहलाता है - यानी अपने काम से दिखाना कि आप वाकई माफी चाहते हैं।
- गलत तरीकों से बचें. कुछ बातें माफी को खराब बना देती हैं। 'लेकिन' का इस्तेमाल न करें ('सॉरी लेकिन तुमने भी...')। दूसरों पर दोष न डालें या बहाने न बनाएं। जबरदस्ती माफी न मंगवाएं क्योंकि तब यह दिल से नहीं आती। अगर बच्चा तुरंत माफी के लिए तैयार नहीं है तो धैर्य रखें और समझाएं कि माफी क्यों जरूरी है।