माता-पिता के लिए ट्रस्ट कैसे स्थापित करें

अपने माता-पिता की संपत्ति और भविष्य की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनाने की संपूर्ण गाइड।. HowTo: Family Edition: family how-tos that actually help.

  1. ट्रस्ट क्या है और क्यों जरूरी है. ट्रस्ट एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें संपत्ति का मालिकाना हक किसी तीसरे व्यक्ति (ट्रस्टी) को दिया जाता है ताकि वह उसका इस्तेमाल लाभार्थी के फायदे के लिए करे। यह प्रक्रिया माता-पिता की संपत्ति को कानूनी झंझटों से बचाती है, टैक्स की बचत करती है, और यह सुनिश्चित करती है कि उनकी इच्छा के अनुसार संपत्ति का बंटवारा हो। अगर माता-पिता अचानक निर्णय लेने में असमर्थ हो जाएं, तो ट्रस्ट के जरिए उनकी देखभाल और खर्च का प्रबंधन आसान हो जाता है।
  2. ट्रस्ट के प्रकार समझें. मुख्य रूप से दो प्रकार के ट्रस्ट होते हैं - रिवोकेबल और इरिवोकेबल। रिवोकेबल ट्रस्ट में माता-पिता अपनी जिंदगी में बदलाव कर सकते हैं और संपत्ति पर नियंत्रण रख सकते हैं। इरिवोकेबल ट्रस्ट में एक बार बनने के बाद बदलाव नहीं किया जा सकता, लेकिन इसमें टैक्स के फायदे ज्यादा होते हैं। अपने माता-पिता की स्थिति के अनुसार सही प्रकार का चुनाव करना जरूरी है।
  3. कानूनी सलाह लें और दस्तावेज तैयार करें. ट्रस्ट बनाना जटिल कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए पहले एक अनुभवी वकील से सलाह लेना अनिवार्य है। वकील आपको बताएगा कि कौन सा ट्रस्ट आपके माता-पिता के लिए उपयुक्त है। उनकी सारी संपत्ति की सूची बनाएं - घर, जमीन, बैंक अकाउंट, शेयर, गहने आदि। सभी मूल दस्तावेज जैसे प्रॉपर्टी पेपर, पैन कार्ड, आधार कार्ड तैयार रखें। ट्रस्ट डीड में स्पष्ट रूप से लिखें कि कौन सी संपत्ति ट्रस्ट में जा रही है और कौन लाभार्थी होंगे।
  4. ट्रस्टी का चयन करें. ट्रस्टी का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है क्योंकि यह व्यक्ति आपके माता-पिता की संपत्ति का जिम्मेदार होगा। आप खुद, कोई भरोसेमंद रिश्तेदार, या प्रोफेशनल ट्रस्ट कंपनी को ट्रस्टी बना सकते हैं। ट्रस्टी ईमानदार, जिम्मेदार और वित्तीय मामलों में समझदार होना चाहिए। दो ट्रस्टी रखना भी अच्छा विकल्प है ताकि एक की अनुपस्थिति में दूसरा काम संभाल सके। ट्रस्टी की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से लिखित में बताएं।
  5. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करें. ट्रस्ट डीड को नोटरी कराना जरूरी है। अगर ट्रस्ट में अचल संपत्ति शामिल है तो उसे रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्टर कराना अनिवार्य है। ट्रस्ट के लिए अलग बैंक अकाउंट खोलें और टैक्स रजिस्ट्रेशन कराएं। सभी संपत्ति के कागजात में ट्रस्ट का नाम दर्ज कराएं। बीमा पॉलिसी, बैंक अकाउंट, और इन्वेस्टमेंट के नॉमिनी बदलकर ट्रस्ट का नाम करवाएं।
  6. नियमित निगरानी और अपडेट. ट्रस्ट बनने के बाद भी नियमित रूप से इसकी समीक्षा करते रहें। ट्रस्टी ठीक से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है या नहीं, इसकी जांच करें। हर साल ट्रस्ट का अकाउंट चेक करें और जरूरी टैक्स रिटर्न फाइल करें। अगर माता-पिता की स्थिति में बदलाव हो या नई संपत्ति आए तो ट्रस्ट में संशोधन कराएं। ट्रस्ट के सभी कागजात सुरक्षित जगह पर रखें और पूरे परिवार को इसकी जानकारी दें।