बच्चों को दादा-दादी या नाना-नानी के बिछड़ने का दुख सहने में कैसे मदद करें

जानें कि अपने बच्चों को प्रिय दादा-दादी के गुजर जाने के दुख से उबरने में कैसे सहायता करें।. HowTo: Family Edition: family how-tos that actually help.

  1. खबर बताने का सही तरीका. बच्चे को शांत माहौल में, उसके करीब बैठकर सीधी और सरल भाषा में बात करें। 'दादाजी अब हमारे साथ नहीं हैं' जैसे स्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल करें। 'सो गए हैं' या 'चले गए हैं' जैसे भ्रम पैदा करने वाले शब्दों से बचें। बच्चे के सवालों का धैर्य से जवाब दें और उसकी भावनाओं को समझें। यदि आप खुद भावुक हो रहे हैं तो यह दिखाना भी ठीक है - इससे बच्चा समझेगा कि दुखी होना सामान्य बात है।
  2. बच्चे की भावनाओं को समझना और स्वीकार करना. बच्चे गुस्सा, उदासी, डर, या कभी-कभी कोई भावना न दिखाकर भी अपना दुख व्यक्त कर सकते हैं। सभी भावनाओं को सामान्य और स्वीकार्य बताएं। 'तुम्हारा गुस्से में होना ठीक है' या 'रोना बिल्कुल सामान्य है' कहकर उन्हें आश्वासन दें। कुछ बच्चे अचानक छोटे बच्चों की तरह व्यवहार करने लगते हैं या स्कूल में परेशानी होती है - यह सब शोक की प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके साथ अतिरिक्त धैर्य रखें।
  3. यादों को जिंदा रखने के तरीके. दादा-दादी की अच्छी यादों के बारे में बात करने को बढ़ावा दें। उनके साथ की तस्वीरें देखें, उनकी पसंदीदा कहानियां सुनाएं, या वे गाने गाएं जो वे गाया करते थे। बच्चे को एक स्मृति बॉक्स बनाने के लिए प्रेरित करें जिसमें वे दादा-दादी से जुड़ी चीजें रख सकें। उनकी तस्वीर पर फूल चढ़ाना, उनका पसंदीदा खाना बनाना, या उनके सम्मान में कोई अच्छा काम करना भी अच्छे तरीके हैं।
  4. दैनिक जीवन में सहारा देना. बच्चे की दिनचर्या को जितना हो सके सामान्य रखें। स्कूल, खेल, और दोस्तों से मिलना जारी रखना महत्वपूर्ण है। रात को सोते समय अतिरिक्त आराम दें क्योंकि बच्चों को नींद की समस्या हो सकती है। उनके पसंदीदा खाने बनाएं और उनके साथ ज्यादा समय बिताने की कोशिश करें। यदि बच्चा स्कूल में ध्यान नहीं दे पा रहा तो उसके शिक्षक को स्थिति के बारे में बताएं।
  5. आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सहारा. अपनी पारिवारिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बच्चे को समझाएं कि मृत्यु के बाद क्या होता है। यदि आपका परिवार आत्मा और पुनर्जन्म में विश्वास रखता है तो इसे सरल तरीके से समझाएं। धार्मिक या सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में बच्चे को शामिल करें, लेकिन जबर्दस्ती न करें। प्रार्थना, मंत्र जाप, या मौन रखना जैसी क्रियाओं से बच्चों को मानसिक शांति मिल सकती है।